Tuesday, April 28, 2026

डॉक्टर और परिजन - नीतेन्द्र सिंह परमार भारत

डॉक्टर और परिजन

आज के समय में हम डॉक्टर को भगवान का दर्जा देते हैं। जब कोई मरीज सड़क दुर्घटना या किसी गंभीर घटना के बाद अस्पताल लाया जाता है, तब उसके परिजन डॉक्टरों से जीवन बचाने की उम्मीद रखते हैं। कई बार मरीज की स्थिति इतनी गंभीर होती है कि वह जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा होता है। ऐसे समय में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ अपनी पूरी क्षमता, अनुभव और मेहनत से उसे बचाने का प्रयास करते हैं।
जब तक उपचार चलता रहता है, तब तक परिजन डॉक्टर को भगवान का रूप मानते हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश यदि उपचार के दौरान मरीज की मृत्यु हो जाती है, तो वही डॉक्टर अचानक आरोपों के घेरे में आ जाता है। जिस व्यक्ति ने मरीज को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, उसी पर लापरवाही का आरोप लगाया जाने लगता है।
स्थिति कई बार इतनी तनावपूर्ण हो जाती है कि मरीज के परिजन डॉक्टर की शिकायत करने, अभद्र व्यवहार करने, यहाँ तक कि हिंसा पर उतारू हो जाते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि हर डॉक्टर का पहला उद्देश्य मरीज का जीवन बचाना होता है। डॉक्टर भी इंसान हैं, भगवान नहीं। वे अपनी पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करते हैं, लेकिन हर परिस्थिति उनके नियंत्रण में नहीं होती।
समाज को यह समझने की आवश्यकता है कि गंभीर दुर्घटनाओं और आपात स्थितियों में कई बार मरीज की हालत पहले से ही अत्यंत नाजुक होती है। ऐसे में डॉक्टरों के प्रयासों का सम्मान करना चाहिए, न कि उन पर बिना कारण आरोप लगाना चाहिए। डॉक्टर और परिजनों के बीच विश्वास, संयम और संवेदनशीलता ही बेहतर समाज की पहचान है।
लेखन :
नीतेन्द्र सिंह परमार 'भारत'
विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत 
छतरपुर, मध्यप्रदेश

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डॉक्टर और परिजन - नीतेन्द्र सिंह परमार भारत

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