Thursday, April 14, 2022

सच को सच ही कहेंगे डरेंगे नहीं। - नीतेंद्र भारत

मुक्तक 

सच को सच ही कहेंगे डरेंगे नहीं।
भाव दूषित भी मन में भरेंगे नहीं।।
अब बहुत हो चुका ध्यान देकर सुनों।
मारे बिन शत्रु को हम मरेंगे नहीं।।

नीतेंद्र भारत
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Saturday, April 9, 2022

राष्ट्रीय सचिव बनाया गया - नीतेंद्र परमार



आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष महोदय गोपाल सर जी आपके द्वारा और सभी पदाधिकारियों के द्वारा नर्सिंग के क्षेत्र में जो अद्भुत अद्वितीय और अनुकरणीय कार्य नर्सिंग छात्र संगठन कर रहा है वास्तव में वह सराहनीय है अनुकरणीय है देश में प्रदेश में ऐसा कोई संगठन नहीं है जो नर्सिंग की इस अव्यवस्थाओं को सही करवा सकें यदि किसी संगठन का नाम आता है तो वह नर्सिंग छात्र संगठन है जिसमें सभी हमारे सदस्यगण और पर अधिकारी बंधु तन मन धन से निस्वार्थ भाव से सहयोग करते हैं और नर्सिंग के क्षेत्र को बेहतर बनाने का प्रयास करते हैं इसी तारतम्य में मैं पहले जिला अध्यक्ष रहा फिर आपने मुझे प्रदेश महासचिव का कार्यभार दिया तदोपरांत अब आप मुझे राष्ट्रीय सचिव का कार्यभार सौंप रहे हैं जिसे मैं सहर्ष स्वीकार करता हूं और मेरे द्वारा जितना मुझसे बन सकेगा मैं संगठन के लिए इमानदारी पूर्वक सभी कार्य संपादन करूंगा तथा विस्तार पर भी आपके सहयोग से चर्चा करूंगा और बेहतर से बेहतर करने का प्रयास करूंगा हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। नीतेंद्र

Thursday, April 7, 2022

राम जी का चाहा काम- नीतेंद्र भारत

जय श्रीराम

मनहरण घनाक्षरी छंद

राम जी का चाहा काम,होता पल भर में ही।
विधि का विधान कोई,कैसे मेट पायेगा।।
राम को पठा के वन, दुखी दशरथ  मन।
नीति औ अनिति का भी,भेद कौन गायेगा।।
हृदय उठी जो पीर,धरता न मन धीर।
बिलख -बिलख तन,किसको सुनायेगा।।
भाग्य में लिखी जो बात,टलती ना टाले कभी।
कर्म की गति से प्रभु ,नाम ही बचायेगा।।

नीतेंद्र सिंह परमार 'भारत'
छतरपुर,मध्यप्रदेश

Saturday, April 2, 2022

श्री राम वनगमन काव्ययात्रा छतरपुर में।

आज दिनांक 1 अप्रैल2022 को श्री राम वनगमन काव्ययात्रा श्रीलंका से अयोध्या की बढ़ रही है इसी तारतम्य में अपने नगर छतरपुर में यह यात्रा बड़ी ही हर्ष उल्लास के साथ निकाली गई जिसमें बाबा सत्यनारायण मौर्य जी आ० जगदीश मित्तल बाबू जी व दिनेश शर्मा जी व श्री हनुमान टौरिया रावतन ट्रस्ट के समस्त कार्यकर्ता व पदाधिकारी बंधु उपस्थित रहे। और काव्य पाठ का आयोजन हुआ। जिसमें नगर के युवा रचनाकारों ने अपने काव्य सुमन श्रीराम जी के चरणों में समर्पित किये। आप सभी का बहुत बहुत आभार।

Friday, March 18, 2022

होली चौकड़िया :- नीतेंद्र भारत

चौकड़िया होली

राधा सांवरिया से बोली,मिलजुल खेले होली।
लाल गुलाल लगा गालन पे,सूरत लगवे भोली।।
मुरलीधर के संग में निकली,ग्वाल बाल की टोली।।
भारत ने घनश्याम लला पे,डाली रंग की झोली।।

नीतेन्द्र सिंह परमार " भारत "
छतरपुर  ( मध्यप्रदेश ) 

Sunday, February 27, 2022

धूल - आ० शंकर केहरी जी



कविता - धूल

   !!धूल!!

धूल को धूल समझना भूल है
धूल अतीत और भविष्य का मूल है
जब आंधी आती है
पैरों तले  पड़ी धूल
घुस जाती है आंखों में
चिपक जाती कपड़े से
ढक लेती अपने आकाश को
झकझोर देती उस विश्वास को
जो तुक्ष, व्यर्थ ,बोझ समझता
धूमिल धूसरित रौंदी जाती धूल को
भूलना मत
धूल में शामिल है
धूल में मिल चुके
पहाड़ कि विशालता
नदी का प्रवाह
समंदर की गर्जना
वृक्ष की मजबूती
भुपतियों का राजमुकूट
प्रतिमान पुस्तकों के पन्ने

धूल को धूल समझना भूल है
धूल अतीत और भविष्य का मूल है।।
धूल का परवाह करो 
धूल से डरो
धूल बनने से पहले
धूल की समझ होने पर
धूल का साथ और सहयोग होने पर
दुनिया सिमट कर 
आंगन में समा जाएगी
एकाकार हो जाएगा
अंदर बाहर का अंतर्द्वंद
फिर मुट्ठी में बंद कर लोगे आकाश
खिड़की पर बादल का पर्दा होगा
दीवार में बन जाएंगे जरूरी दरवाजे
धूल का अस्तित्व शाश्वत है
धूल में विभेद मत करो
गमले में गुलाब उगाओ गेहूं नहीं 
धूल चाहे तो 
गेहूं कल गुलाब बन सकता है
नागफनी भी कांटेदार गुलाब बन सकता है

धूल को धूल समझना भूल है
धूल अतीत और भविष्य का मूल है ।।

शंकर केहारी
लिंकः- https://youtu.be/pB9nl2y0tWo

Friday, February 25, 2022

जीवन का मर्म -नीतेंद्र परमार भारत


जीवन का मर्म

कभी -कभी जिंदगी में ऐसा होता है, कभी-कभी क्या अक्सर ऐसा होता है कि हम जमाने से कुछ कहना चाहते हैं, लोगों से कुछ कहना चाहते हैं, परंतु दिल की बात दिल में दबी ही रह जाती हैं, दिल की बात कहीं ना कहीं आत्मा में कसक पैदा करती है, बहुत कुछ ऐसा होता है जो आदमी अभिव्यक्त करना चाहता है, जीवन में बदलाव चाहता है परंतु कह नहीं पाता है।
 अपनी रोजी-रोटी एवं जीवन कर्तव्य को निभाने के साथ - साथ हमारा मनुष्य होने के नाते, प्रकृति एवं उस सर्वशक्तिमान ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए  कुछ कर्म होते हैं जो हमें सेवा भाव से परहित के परोपकार हेतु करने पड़ते हैं। मतलब जीवन में सार्थकता सकारात्मकता एवं सहिष्णुता का सामंजस्य अति आवश्यक है कर्म करते रहना और फल की इच्छा ना करना अकर्मक होकर सकर्मक बने रहना यही गीता का उपदेश भी है।

हमारे कर्मो से जीवन की सार्थकता सकारात्मकता सहजता सहृदयता सरलता एवं सेवा भाव प्रस्तुत हो, कभी ऐसा ना लगे कि हम अपने कर्मों से जी चुराते हैं या अपने कर्मों में केवल स्वार्थ स्वरूप ही जुड़े हुए हैं कभी ऐसा ना लगे कि हम अन्य प्राणियों से अलग नहीं है यदि खाना-पीना और परिवार बढ़ाना ही मानव जीवन का उद्देश्य होता तो अन्य प्राणियों और मानव में कोई अंतर समझ में नहीं आता| इसलिए मेरे प्यारे मित्रों जीवन की सार्थकता कर्मों के महत्त्व, सेवा भाव एवं जन हितार्थ कार्यों पर ही निर्भर है।
 जीवन में सक्रियता बनी रहे और मन कभी हतोत्साहित ना हो कभी छोटे से बच्चे को देखकर उसकी ऊर्जा और कार्य करने की लगन को देखकर कुछ पाने की लालसा को देखकर हमें कुछ सीख लेना चाहिए। कभी उस 80 वर्ष के वृद्ध को देख कर हमें कुछ सीख लेना चाहिए जोकि उम्र के आखिरी पड़ाव में भी कुछ सीखने के लिए लालायित रहता है कभी उस बगीचे के माली से भी हमें कुछ सीख लेना चाहिए जो बीज को माटी में अंकुरित करके और पेड़ बनने से लेकर फल देने तक पौधे का पालन- पोषण करता है और नियमित रूप से कर्म करता रहता है।मेरी आप सभी साथियों से गुजारिश है कि जीवन को निरर्थक ना बनाएं जीवन को सार्थक एवं उच्च कोटि का बनाएं जो कि आपके सकारात्मक एवं उच्चतम कर्मों से ही संभव है। जनहितार्थ प्रकृति हितार्थ कार्यों से जीवन की सहजता जीवन की उच्चता एवं सार्थकता को बनाए रखें ऐसी ही कामना के साथ बहुत-बहुत सेहतमंद, आनन्दमय और शानदार जीवन की कामना करता हूँ।

नीतेंद्र सिंह परमार 'भारत'
छतरपुर, मध्यप्रदेश

काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

छतरपुर, दिनांक 11 जुलाई 2026 विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत, मध्यप्रदेश की छतरपुर इकाई द्वारा स्वामी विवेकानंद सभागार, गायत्री शक्तिप...