Friday, April 7, 2023

भगवान श्री महावीर स्वामी जी की 2622 वीं जन्म जयंती के पावन अवसर पर दिनांक 3 अप्रैल 2023 को पलेरा जिला टीकमगढ़ में कवि सम्मेलन का आयोजन


भगवान श्री महावीर स्वामी जी की 2622 वीं जन्म जयंती के पावन अवसर पर दिनांक 3 अप्रैल 2023 को पलेरा जिला टीकमगढ़ में कवि सम्मेलन का आयोजन धर्म प्रभावना समिति के  द्वारा हुआ। व आ० राजेन्द्र जैन जी का विशेष सहयोग,प्रेम रहा। कार्यक्रम का संयोजन आ० संजय जैन जी भाई साहब के द्वारा किया गया। कार्यक्रम का श्रेष्ठ संचालक आ० देवेंद्र चतुर्वेदी भाई साहब जी के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बड़े भाई प्रदीप दिहुलिया जी के द्वारा देर रात्रि तक श्रोताओं को हँसाया गुदगुदाया गया। तो वहीं अपने क्रम में आ० जीतेंद्र यादव जीत जी ने लोगों को खड़े होकर तालियां बजाने को मजबूर कर दिया अपनी ओज पूर्ण रचनाओं को सुना कर। आ० रजनी श्रीवास्तव जी ने अद्भुत गीत पढ़े समस्त श्रोतागण मनमुग्ध होते नज़र आये। तो वही समाज में फैली कुप्रथा व विसंगतियों पर व्यंग्य करते हुए संजय जैन जी ने रचनाएं पढ़ी। साथ ही मुझें भी यानी नीतेंद्र भारत को  पलेरा वासियों ने अनुपम स्नेह दिया और मेरे छन्दों और गीतों को सुना। 
पुनः मैं आभार व्यक्त करता हूँ । आप सभी अपना स्नेह बनाये रखें। 

नीतेंद्र सिंह परमार 'भारत'

Tuesday, February 14, 2023

"विशिष्ट अतिथि - डॉ०संतोष कुमार सिंह "सजल"


"विशिष्ट अतिथि -डॉ० संतोष कुमार सिंह 'सजल" के कलम से  - संस्था के द्वारा इस अनुपम,अनूठे प्रयोग को सादर नमन करता हूँ ।संस्था  समय समय पर ऐसी प्रस्तुति एवं कार्यक्रम करके निश्चित रूप से संस्था के पदाधिकारियों को अन्य संस्था के पदाधिकारियों से विशेष बनाती है । इस अनूठे प्रयोग की प्रेरणा आदरणीया धस्माना दीदी जी ,इस बीज को रोपित करने वाले आदरणीय सरस जी एवं अपने असाध्य परिश्रम से पुष्पित एवं पल्लवित करने वाले संस्था के हनुमान जी आदरणीय  फुल्लरा जी ,संस्था के समस्त कार्यक्रम में जान फूकने के क्षमता के धनी सादर प्रिय अनुज भारत जी के साथ साथ इस कार्यक्रम में चार चाँद लगाने वाले अद्भुत विलक्षण सितारे जो समय समय पर भिन्न-भिन्न दायित्त्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर सामान्य को विशिष्ट बनाने की महारथ हासिल कर्ता सर्व श्री  आदरणीया नीलम गर्ग जी, आदरणीय सन्तोष कुमार प्रीत जी, आदरणीय डॉ.श्याम गंगवार जी ,डॉ शरद श्रीवास्तव  जी, आदरणीय डॉ राहुल शुक्ला साहिल जी, सादर प्रिय अनुज पंडित सुमित शर्मा पीयूष जी,आदरणीय,मनोज खोलिया जी,आदरणीय राजेश मिश्र प्रयास जी, आदरणीय डॉक्टर विमलेश कुमार हमदम जी, आदरणीय इंजीनियर हेमंत कुमार सिंघई जी।सरस्वती वंदना प्रस्तुत करता आदरणीया डॉ आराधना उपाध्याय जी ,स्वागत गीत प्रस्तुत करता आदरणीया सुनंदा झा जी को विशेष साधुवाद देता हूँ । ऐसे कार्यक्रम का मैं भी साक्षी बना इसके लिए गौरव की अनुभूति हो रही है इसके लिए संस्था का आभारी हूँ ।
"ईश्वर संस्था को उत्तरोत्तर वायु वेग से गतिमान करें । संस्था समाज और हिंदी जगत के लिए  प्राणवायु बने" ऐसी कामना के साथ अपने कलम को विराम देता हूँ। 

जय जय
डॉ०संतोष कुमार सिंह 'सजल

अध्यक्षीय उद्बोधन - आ० सुशीला धस्माना 'मुस्कान'


अध्यक्षीय उद्बोधन 
       
     पटलश्री पर उपस्थित सभी विद्वद् जन, आदरणीय भ्राताश्री कौशल कुमार पांडेय आस जी, संस्था के संस्थापक आदरणीय दिलीप कुमार पाठक सरस जी, मुख्य अतिथि आदरणीय  श्याम  गंगवार जी, विशिष्ट अतिथि आदरणीय डाक्टर संतोष कुमार सिंह जी,   आदरणीया  नीलम गर्ग जी,  आज के संरक्षक आदरणीय संतोष कुमार प्रीत जी,  ई एल्बम  निर्माता आदरणीय ओमप्रकाश प्रकाश प्रफुल्ल जी, संचालक आदरणीय नीतेंद्र सिंह परमार भारत जी , विशेष उद्बोधन कर्ता आदरणीय डाक्टर शरद श्रीवास्तव शरद जी, आदरणीय इंजीनियर संतोष कुमार सिंह जी, आदरणीय शरद श्रीवास्तव शरद जी एवं  विमलेश कुमार हमदम जी ,  , अनुज राजेश मिश्र प्रयास जी, अनुज विमलेश कुमार श्रीवास्तव हमदम जी,  आ० आराधना उपाध्याय जी, आदरणीय  विजय पाण्डेय विप्र जी व  सुनंदा  झा जी सहित सभी उपस्थित बंधुगणों  का पुनः   हार्दिक स्वागत  है!

      अभी  आप   सबने  एक भव्य व दिव्य  विमोचन समारोह  का आनंद  लिया ! आप सभी ने  अवश्य  ही  इस अद्भुत व अनुपम  ई ऐल्बम  का अवलोकन  कर लिया होगा ! यह बहुत ही आकर्षक व मनोहारी बना है। आदरणीया नीलम गर्ग  जी के जीवन वृत्त , कृतित्व व व्यक्तित्व पर यह  प्रकाश डालता प्रतीत होता है  और  हो भी क्यों  न ? अंततः  इसका संकलन आदरणीय ओमप्रकाश फुलारा प्रफुल्ल जी  ने बहुत मान सम्मान  व मनोयोग  से किया है। उनका कार्य  तो सदा ही वंदनीय व अभिनंदनीय होता ही है। 

       इस  बहुप्रतीक्षित  ई ऐल्बम   से निश्चय ही सभी को प्रेरणा मिलती रहेगी ।  आ० नीलम गर्ग जी का सामाजिक प्रकोष्ठ  की पहली सदस्या के रूप में हार्दिक स्वागत व अभिनंदन  है  साथ ही उनकी  ई ऐल्बम  प्रकाशित होने पर उनको   बहुत-बहुत बधाई व शुभकामनाएँ!  

   आज का  विमोचन  कार्यक्रम सदा की भाँति  बहुत ही सुंदर व गरिमामय था। अनुज नीतेंद्र सिंह परमार भारत  जी का संचालन  शानदार  व  जानदार था!
      आप सभी कार्यक्रम  में पधारे हुए गुणीजन  का पुनः स्वागत व अभिनंदन  करते हुए  गौरवान्वित हूँ!
 आप सभी की  गरिमामय उपस्थिति ने इस भव्य विमोचन समारोह  के कार्यक्रम की  शोभा को  द्विगुणित बढ़ा दिया  है। आप सभी ने कार्यक्रम के लिए अपना अमूल्य समय प्रदान किया इसके लिए हमारी संस्था  विश्व जन चेतना ट्रस्ट भारत आपकी बहुत-बहुत आभारी  है तथा   धन्यवाद ज्ञापित करती है।


धन्यवाद!


सुशीला धस्माना 'मुस्कान'
अध्यक्ष 
विश्व जन चेतना ट्रस्ट भारत

'विशेष उद्बोधन' - डॉ० शरद श्रीवास्तव 'शरद'


'विशेष उद्बोधन'

'विश्व जन चेतना ट्रस्ट भारत' के मनोहारी पटल 'जय-जय काव्य चित्रशाला' पर आदरणीया नीलम गर्ग जी के 'ई एल्बम' के विमोचन के शुभ अवसर पर उपस्थित कार्यक्रम के संरक्षक,साहित्य-पथ के समादृत व्यक्तित्व एवम् संस्था के राष्ट्रीय सलाहकार आदरणीय सन्तोष कुमार प्रीत जी!महनीय अध्यक्षा आदरणीया सुशीला धस्माना मुस्कान जी! मुख्य अतिथि एवम विमोचनकर्ता आदरणीय डॉ.श्याम गंगवार जी!विशिष्ट अतिथि एवम संस्था के राष्ट्रीय समन्वयक आदरणीय डॉ. संतोष कुमार सिंह सजल जी! सम्पादक एवम् संस्था के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एवम उत्तराखंड इकाई के अध्यक्ष आदरणीय ओमप्रकाश फुलारा प्रफुल्ल जी! संस्था के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आदरणीय डॉ राहुल शुक्ला साहिल जी! संस्था के अलंकरण प्रमुख प्रिय अनुज पंडित सुमित शर्मा पीयूष जी!अनुशासन प्रमुख भाई मनोज खोलिया जी! राष्ट्रीय सचिव भाई राजेश मिश्र प्रयास जी!अंतर्राष्ट्रीय समन्वयक आदरणीय डॉक्टर विमलेश कुमार हमदम जी! राष्ट्रीय कार्यक्रमाधिकारी आदरणीय इंजीनियर हेमंत कुमार सिंघई जी! माँ वाणी के वरद पुत्र, ऊर्जावान साथी एवं संस्था के राष्ट्रीय कार्यक्रम संचालक प्रिय अनुज नितेंद्र सिंह परमार भारत जी! एवम वागीश्वरी के विग्रह स्वरूप सम्मानित कलमकारों!

आप सबका आज के अवसर विशेष पर हार्दिक स्वागत,वंदन एवं अभिनंदन

भारतवर्ष की एक ऐसी साहित्यिक संस्था जिसने संपूर्ण विश्व में हिंदी के माध्यम से निज राष्ट्र की सभ्यता एवं संस्कृति के निमित्त जन चेतना पैदा करने का बीड़ा उठाया हो,  का नाम *विश्व जन चेतना ट्रस्ट भारत* है। यह संस्था एक ऐसा विशाल मंच है जो केवल भारत वर्ष ही नहीं अपितु देश-दुनिया को अपने भीतर समावेशित कर अद्यतन साहित्य एवं संस्कृति का एक विस्तारित क्षेत्र बन चुका है।आदरणीय दिलीप कुमार पाठक 'सरस' जी,जो संस्था के संस्थापक हैं,के भगीरथ प्रयत्न से उद्भूत हमारी ज्ञान गंगा हिंदी भाषियों, हिंदी प्रेमियों या यूँ कहूँ कि साहित्यानुरागियों को जीवित मोक्ष प्रदान करने का वरेण्य साधन हो चुकी है। विद्वतजन! हमारी आस्था की प्रतीक माँ गंगा तो गोमुख से नि:सृत होकर बंगाल की खाड़ी में विलीन हो जाती हैं लेकिन हमारी संस्था रूपी ज्ञान गंगा ने अपने विस्तृत वितान के माध्यम से संपूर्ण विश्व को आच्छादित कर लिया है। संस्था द्वारा हिंदी के मानवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयास सर्वथा श्लाघनीय हैं।हमारी संस्था निरपेक्ष रूप से साहित्येतिहास में अपने अवदानों एवं प्रतिदानों के लिए स्वर्णाक्षरों में अंकित की जाएगी, इस पर मत वैभिन्य की संभावना दूर-दूर तक नहीं हो सकती। जय-जय हिंदी के समृद्ध साहित्यिक पटल के माध्यम से संपूर्ण साहित्य जगत को एकीकृत कर साहित्य के जिस सांगठनिक ढांचे को सुदृढ़ कर रही है, निश्चित रूप से इस प्रयास के लिए संस्था का प्रशासक मंडल, समस्त पदाधिकारीगण, साहित्य सेवी, कलमकार साथी, विशेषत: कर्मठ एवं जुझारू संस्थापक आदरणीय दिलीप कुमार पाठक *सरस* जी सतत बधाई के पात्र हैं। सम्मानित पटल पर देश दुनिया के कलमकार जुड़कर न केवल अपनी रचनाधर्मिता को प्रमाणित करते हैं, अपितु पटल के माध्यम से ज्ञानियों एवम मनीषियों का सानिध्य और सामीप्य प्राप्त कर धन्यता के शिखर की अनुभूति भी करते हैं। संस्था के पटल पर उपलब्ध विद्वतपरिषद ज्ञान गंगा एवम संस्कार की एक ऐसी प्रवहमान जलधारा है,जिसमें अवगाहन कर न जाने कितने कलमकार अपने प्रारब्ध के पुण्य को फलित होते हुए देखते हैं। हमारी संस्था *विश्व जन चेतना ट्रस्ट भारत*  एक सामान्यीकृत धारणा के अंतर्गत ऐसा प्रतीत होता है कि अपनी सुगंध से साहित्य के धरातल पर  निज राष्ट्र की सीमाओं से बाहर निकलकर संपूर्ण वसुधा को सुवासित कर रही है। यहाँ यह तथ्य भी समान रूप से उल्लेखनीय है कि हमारी मातृभाषा हिंदी का प्रभाव सात समंदर पार तक अनुभूत होने लगा है। साहित्य के इस महायज्ञ की पताका अपने कर कमलों में लिए भारतवर्षोन्नति में हिंदी के अवदान को चिन्हित करते हुए हमारे साहित्यकार साथी उत्कर्ष की ओर अग्रसर हैं। यहाँ यह कहना अतिशयोक्ति पूर्ण नहीं होगा कि साहित्येतिहास में हिंदी को सक्षम,सबल, समर्थ एवम सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए संस्था के अथक प्रयासों को सदैव याद ही नहीं अपितु साहित्य के स्वस्थ आंदोलन में अपनी आहुतियों के माध्यम से हम रचनाकार आंदोलन की धारा को सुदृढ़ करने का जो सद्प्रयास कर रहे हैं, वह भी कालांतर में हमारे गौरवपूर्ण अनुभूति का नियामक होगा।

एक बार पुनः सम्मानित संस्था, यशस्वी संस्थापक, जागरूक संरक्षक मंडल,समर्पित अध्यक्षा,सचेत सलाहकार एवम परामर्शदात्री समिति,दक्ष प्रशासक मंडल, योग्य पदाधिकारी गण एवम समस्त गुणी रचनाकारों के अथक प्रयास एवम समर्पण के प्रांजल भाव हमारी संस्था के दीर्घकालिक गौरवगान  की समवेत स्वर में कामना करते हैं और आदरणीया नीलम जी को एल्बम की बारंबार बधाई एवम शुभकामनाएँ संप्रेषित करते हैं....
   सादर एवम साभार....
डॉ. शरद श्रीवास्तव 'शरद'
सदस्य, प्रशासक मण्डल
            एवम
     'राष्ट्रीय प्रवक्ता'
'विश्व जन चेतना ट्रस्ट भारत'

Thursday, January 12, 2023

स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर हुई काव्य गोष्ठी - चित्रगुप्त मंदिर छतरपुर मध्यप्रदेश


कल चित्रगुप्त मंदिर छतरपुर के सभागार में स्वामी विवेकानंद जी की जयंती ( युवा दिवस ) पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।संचालन आ० प्रमोद सारस्वत जी व संयोजन आ० अंशुमान जी के किया। नगर के सभी वरिष्ठ व नवोदित रचनाकार मौजूद रहे। सभी ने स्वामी जी को समर्पित काव्य पाठ किया। 
हार्दिक आभार।

स्वामी विवेकानंद जयंती ( युवा दिवस ) की हार्दिक शुभकामनाएं।

मुक्तक

सरलता व सहजता में नहीं छल छंद होते हैं।
दिवाकर से चमकते जो नहीं मतिमंद होते हैं।।
हमारे देश भारत का नहीं सानी कोई जग में,
युवाओं के दिलों में बस विवेकानंद होते हैं।।

नीतेंद्र सिंह परमार 'भारत'
छतरपुर,मध्यप्रदेश

Friday, January 6, 2023

गीत- पूरा जीवन रहे भटकते.. अजय मोहन तिवारी


             गीत

पूरा  जीवन  रहे  भटकते,
अपने मन को भरमाने में।
उम्र गवाँ दी हमने आखिर,
केवल मरघट तक आने में।।

बस  आँसू  ही  जोड़े  हमनें,
सुख पाने की अभिलाषा में।
पूर्ण हुआ अनुबंध साँस का
जीवन  खोया  प्रत्याशा  में।।

मौन सिसकती रही वेदना,
अभिनय जैसा मुस्काने में।।.......

रहे पिछड़ते हम जीवन से,
मन के पीछे इतना भागे।
दिवस बिताया स्वप्न देखते,
विषयी बन रातों में जागे।।

ठगे गए हम सदा स्वयं ही,
जगत पहेली सुलझाने में।।........

हमें पता था मृत्यु अटल है,
जीवन का भी नहीं ठिकाना।
जन्म लिया जिसने भी जग में,
उसको इक दिन है मर जाना।।

व्यर्थ लगाया गुणा भाग सब,
अंतिम सच को झुठलाने में।।......

            - अजय मोहन तिवारी


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Monday, January 2, 2023

प्रथम सारस्वत साधना "था भरोसा फिर मिलोगे" का हुआ गरिमामय लोकार्पण। - वनारस उत्तर प्रदेश


एडिटर- नीतेंद्र सिंह परमार 'भारत', वनारस ( उ. प्र.) प्रथम सारस्वत साधना "था भरोसा फिर मिलोगे" का हुआ गरिमामय लोकार्पण।

आपके सतत स्नेह के सुखद प्रतिफल के रूप में आपके साथी की प्रथम काव्य साधना "था भरोसा फिर मिलोगे (गीत शतक)" का लोकार्पण नववर्ष के आलोक में दिनांक 01/01/2023 को राजकीय जिला पुस्तकालय,वाराणसी में जिला पुस्तकालयाध्यक्ष एवम वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय के.एस. परिहार जी के संयोजन एवम साहित्य पथ के भ्राता द्वय आदरणीय प्रसन्न बदन चतुर्वेदी अनघ जी एवम आदरणीय सन्तोष कुमार प्रीत जी के संयुक्त संचालन में साहित्याकाश के मनीषियों यथा- सोच विचार के यशस्वी सम्पादक, साहित्य भूषण डॉ.जितेन्द्र नाथ मिश्र जी (अध्यक्ष), मैंने अनुभव से सीखा है के चर्चित रचनाकार एवम अपर आयुक्त,वाराणसी आदरणीय विष्णु भूषण मिश्र जी(मुख्य अतिथि), शैल शिखर की छाँव में एवम धरा का रंग धानी के चर्चित लेखक एवम सम्प्रति संयुक्त शिक्षा निदेशक, वाराणसी मण्डल वाराणसी आदरणीय डॉ.प्रदीप कुमार जी (सारस्वत अतिथि), कविताम्बरा एवं नई सदी के स्वर के यशस्वी सम्पादक श्रद्धेय हीरालाल मिश्र मधुकर जी (विशिष्ट अतिथि), आचार्य रामचन्द्र शुक्ल साहित्य शोध संस्थान की अध्यक्षा एवम श्रेष्ठ साहित्यकार आदरणीया डॉ. मुक्ता जी (विशिष्ट अतिथि), पुनश्च साहित्य जगत के अन्यान्य वरेण्य एवम ख्यातिलब्ध साहित्यकारों की गरिमामय उपस्थिति में सोल्लास हुआ...


डॉ.शरद श्रीवास्तव 'शरद' गीतकार
वनारस उत्तर प्रदेश

काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

छतरपुर, दिनांक 11 जुलाई 2026 विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत, मध्यप्रदेश की छतरपुर इकाई द्वारा स्वामी विवेकानंद सभागार, गायत्री शक्तिप...