Friday, July 19, 2019

डमरू छंद सोम जी

◆डमरू घनाक्षरी◆

   (वर्षा वर्णन)

शिल्प~32 वर्ण बिना मात्रा,8,8,8,8
वर्णों पर यति, चार चरण समतुकांत।

बरसत जब जल,
  बहत  धरन  तल,
    कलरव कल-कल,घनन-घनन घन।
मकर उरग गन,
  हरषत  मन-मन,
    बन  मन  उड़गन, बगरत वन-वन।।
सकल  धरन तर,
  सरस  बहत झर,
    जल थल  नभचर,लगत मगन मन।
दलदल मग-मग,
  सरकत पग-पग,
    मदन बदन  लग,जगत अगन तन।।

                          ~शैलेन्द्र खरे"सोम"

No comments:

Post a Comment

काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

छतरपुर, दिनांक 11 जुलाई 2026 विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत, मध्यप्रदेश की छतरपुर इकाई द्वारा स्वामी विवेकानंद सभागार, गायत्री शक्तिप...