Sunday, September 15, 2019

ग़ज़ल:- हीरा लाल यादव

*ग़ज़ल*
121 22 121 22

बदी के पथ पर चला न करना।
गुनाह   ऐसा  किया  न करना।

मिला  हो  धोखा  तुम्हें  भले ही
मगर किसी से  दग़ा न करना।

करो जो करना हो अपने दम पर
किसी का  रस्ता तका न करना।

वो होगा लिक्खा नसीब में जो
फिजूल डर में जिया न करना।

लगा लिया है किसी से दिल तो
ग़मों का हर्गिज़ गिला न करना।

किसी भी झूठे गुमाँ में पड़ कर
हवा में हर्गिज़ उड़ा न करना।

निभाना मुश्किल हो जिसका *हीरा*
कभी वो रिश्ता रखा न करना।

              हीरालाल

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