Tuesday, April 16, 2019

आ० हीरालाल यादव जी

*ग़ज़ल*
2122 1212 22/112

ज़िन्दगी  ऐसे  इम्तिहान  न ले।
दर्द   दे  दे  के रोज़ जान न ले।

हौसला  तोड़कर  मेरा  हर दिन
छीन  मुझसे  मेरा  गुमान न ले।

बोलने  वाले सच, सँभल के रह
काट दुनिया  कहीं जुबान न ले।

बस  इसी  डर में जी रहे हैं सब
राज़-ए-दिल और कोई जान न ले।

सच की राहों पे चल के तू *हीरा*
अपना दुश्मन बना जहान न ले।

                 हीरालाल

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