Monday, March 4, 2019

ग़ज़ल आ० हीरालाल जी

2122 1122 1122 22

जो मिला उसको गले हँस के लगाया हमने।
प्यार दुश्मन से भी हर वक्त जताया हमने।

जब भी दुश्मन ने गड़ाई है नज़र सीमा पर
तो  मिटाने  में  नहीं   वक्त गँवाया हमने।

वो समझता ही नहीं बात कोई भी दिल की
कैसे नादान से दिल अपना लगाया हमने।

जो मिला उसमें किया हँस के गुज़ारा अपना
बैठ  कर  अश्क  नहीं  यार बहाया हमने।

हम हैं अच्छे तो ज़माना भी है अच्छा *हीरा*
हर घड़ी पाठ यही ख़ुद को पढ़ाया हमने।

                    हीरालाल

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