Friday, May 17, 2019

( 2 ) अनंग पाल सिंह भदौरिया"अनंग

सबके अन्दर बसे  हैं , अमर पुरी  सुरलोक ।
स्वर्ग इसीका नाम है , यहाँ नहीं भय,शोक ।।
यहाँ नहीं भय,शोक,यहाँ सुख का बजार है ।
बाहर कोई वस्तु , नहीं  सुख  का प्रकार है ।।
कह"अनंग"करजोरि,विषय वासना समुन्दर ।
मत डूबो, उतराउ , स्वर्ग  है  सबके  अन्दर ।।
             अनंग पाल सिंह भदौरिया"अनंग"

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