तर्ज -होठो से छू लो तुम
दीपक बनकर जग में,अंधकार हरण कर लो
पाखण्ड का पर्दा हटा,बुध्द धम्म ग्रहण कर लो
जग में मनुवाद बढ़ा, और अत्याचार बढ़े
नर नीच बता उनपर, हिंसक कानून गढ़े
नई रीत जगा जग में,करुणा समता कर लो
दीपक बनकर------
बुध्द खोज बताया है,धर्म ढोंग पसारा है
मानव निज स्वार्थ तले,इसे यहां विस्तारा है
जन्म से कोई जाति नही,बुध्द वाणी ग्रहण कर लो
दीपक बनकर जग में-------
कोई जन्म से शुद्र नही,कोई जन्म से विप्र नही
मानव जो कर्म करे,नर की पहचान वही
सन्मार्ग दिखाए जो ,वही धम्म ग्रहण कर लो
दीपक बनकर ----
रचना-नन्दकिशोर डोंगरे वारासिवनी 21-5-2019
आप सभी के लिए एक नये रूप में। साहित्यिक सांस्कृतिक सामाजिक जानकारी। प्रदेश अध्यक्ष नीतेन्द्र सिंह परमार " भारत " विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत छतरपुर ( मध्यप्रदेश )
Wednesday, May 22, 2019
गीत:- नंदकिशोर डोंगरे
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काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन
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