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Thursday, May 16, 2019

कुण्डलियां ( 1 ) आ० अनंग पाल सिंह भदौरिया

शक्ति स्वरूपा जानिए, सारे आत्मस्वरूप ।
यही मानवी लक्ष्य है, यही लक्ष्य का रूप ।।
यही लक्ष्य का रूप,तत्व यह जाग्रत, चेतन।
धारण करे निवास , देह  के रूप अचेतन ।।
कह"अनंग"करजोरि , यही भूपों का भूपा ।
साधन है यह देह , आत्मा शक्ति स्वरूपा ।।

           अनंग पाल सिंह भदौरिया"अनंग"

Tuesday, March 5, 2019

आ० हीरालाल यादव जी

2122 1212 22

ख्वाब ख़ुशियों के दिल सज़ा मत यूँ।
जानकर   के   फ़रेब  खा  मत  यूँ।

बाँध   कर  तू   किसी  से  उम्मीदें
दर्द  को   हमसफ़र   बना  मत  यूँ।

कुछ  तो  उम्मीद  दिल  में रहने दे
आस  का  दीप  हर  बुझा मत यूँ।

और  कुछ  भी  सज़ा  तू दे लेकिन
दिल  से  दिलबर  मुझे  भुला मत यूँ।

साथ   हँस   बोलकर   रकीबों  के
दिल  पे  बिजली  मेरे  गिरा मत यूँ।

ज़िन्दगी   चार  दिन  की  है   *हीरा*
नफ़रतों   में   इसे   गँवा  मत   यूँ।

               हीरालाल

काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

छतरपुर, दिनांक 11 जुलाई 2026 विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत, मध्यप्रदेश की छतरपुर इकाई द्वारा स्वामी विवेकानंद सभागार, गायत्री शक्तिप...