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Tuesday, January 7, 2020

गीत:- केवल प्यारा दिखता तन। नीतेन्द्र भारत

*गीत:-*

कितना और कमाये धन,
कही नहीं लगता है मन।
पहन मुखौटा सभी घूमते,
केवल प्यारा दिखता तन।।

चारो तरफ शिकारी बैठे,
जैसे सुनो मदारी बैठे।
ओढ़ दुशाला धर्म जाति की,
ऐसे यहां पुजारी बैठे।।
जातिवाद से ऊपर उठकर,
काम करें हम तो सब जन।
पहन मुखौटा सभी घूमते,
केवल प्यारा दिखता तन।।1।।

आदर करना छोड़ दिया है,
जीवन को क्या मोड़ दिया है।
एक झलक पाने की खातिर,
नाता घर तोड़ दिया है।।
पागलपन के दौर में देखो,
मिलते नहीं कही सज्जन।
पहन मुखौटा सभी घूमते,
केवल प्यारा दिखता तन।।2।।

धर्म ग्रंथ क्यों बाँट रहे हो,
आपस में ही छाँट रहे हो।
वामपंथ के ठेकेदारों,
भारत को क्यों काट रहे हो।।
अक्षकुमार सा बध करने को,
आयेगें अब सुनो पवन।
पहन मुखौटा सभी घूमते,
केवल प्यारा दिखता तन।।3।।

आपस में लड़वाते क्यों हो,
तुम हराम का खाते क्यों हो।
भारत में रह करके बोलो,
गान पाक का गाते क्यों हो।।
चेत सको गर चेत लो अब भी,
बन जाओ लकड़ी चंदन।
पहन मुखौटा सभी घूमते,
केवल प्यारा दिखता तन।।4।।

राष्ट्र प्रेम का पाठ सिखाओ,
भारत में मिलकर तुम गाओ।
उठो हिंद के वीर जवानों,
वतन की मिट्टी माथे लगाओ।।
सभी देश से पहले अपने,
भारत का करते वंदन।।
पहन मुखौटा सभी घूमते,
केवल प्यारा दिखता तन।।5।।

नीतेन्द्र सिंह परमार "भारत"
छतरपुर मध्यप्रदेश

Sunday, April 21, 2019

गीत :- आदमी न रहा आदमी के लिए

*गीत*
*आदमी न रहा आदमी के लिये*

कोई पी के जिये,कोई जी के जिये।
आदमी न रहा आदमी के लिये।।

मैं भटकता रहा,लोग चलते रहे।
आँधी तूफा में हरदम ही जलते रहे।।
सत्य सब जानते,बैठे मुँह को सिये।।
आदमी न रहा आदमी के लिये।।1।।

आज मौसम भी पल में बदलता दिखा।
वक्त  वे वक्त मैंने तो सबकुछ लिखा।।
है अंधेरा बहुत अब जलाओ दिये।।
आदमी न रहा आदमी के लिये।।2।।

भोर से शाम तक वो तो मिलते नहीं।
पुष्प भी बाग में अब तो खिलते नहीं।।
मन मचलता मेरा और मचलता हिये।
आदमी न रहा आदमी के लिये।।3।।

राह भी सत्य की अब दिखा दीजिए।
कर्म अच्छा करूं अब सिखा दीजिए।।
कर्म भारत में *भारत* ने अच्छे किये।।
आदमी न रहा आदमी के लिये।।4।।

--- नीतेन्द्र सिंह परमार "भारत"
     छतरपुर  [ मध्यप्रदेश  ]

मुक्तक नीतेन्द्र भारत

*मुक्तक*

किये जो कर्म वीरों ने,सदा यशगान लिखता हूँ।
नयन में जो दिखी ज्वाला,वही पहचान लिखता हूँ।।
हकीकत क्या कहूं उनसे,जो खुद घर के लुटेरे हैं।
कलम में भर लहू अपना,मैं हिन्दुस्तान लिखता हूँ।।

- नीतेन्द्र सिंह परमार "भारत"

Saturday, April 20, 2019

आ० हीरालाल यादव जी

*ग़ज़ल*
212  212  212

ख़ुद ही ख़ुद से अदावत न कर।
पत्थरों    से   मुहब्बत   न कर।

ख़ुद  में  भी झाँक कर देख ले
हर घड़ी  बस शिकायत न कर।

हाथ   आये  हैं  किसके यहाँ
चाँद  तारों  की चाहत न कर।

दिल दुखा कर के अपनों का यूँ
घर से ख़ुशियों को रुखसत न कर।

कर न नज़र-ए-इनायत भले
इल्तिज़ा है कि नफ़रत न कर।

पड़ के लालच में  *हीरा* किसी
नफ़रतों की तिजारत न कर।

                  हीरालाल

Friday, April 19, 2019

हनुमान जयंती

*_जय श्री राम जय हनुमान_*

राम नाम जप करने वाले।
संकट सबके हरने वाले।।1।।
अतुलित बलशाली हनुमंता।
अद्भुत रूप दिखाया संता।।2।।
हीय में श्रीराम का वासा।
करते सदा निशाचर नाशा।।3।।
सीता माँ का पता लगाया।
क्षण में लंका नगर जराया।।4।।
पवनपुत्र की कथा निराली।
सूरत सुन्दर भोली भाली।।5।।
करनी कथनी एक समाना।
ईश्वर  श्रीराम को माना।।6।।
काम क्रोध मद माया छोड़ो।
हनुमान से नाता जोड़ो'।।7।।
आप हो हनुमत अंतर्यामी।
*भारत* पड़ा शरण में स्वामी।।8।।

- नीतेन्द्र सिंह परमार "भारत"
  छतरपुर  ( मध्यप्रदेश )

Thursday, April 18, 2019

आ० हीरालाल यादव

122 122 122 122

वो दिल मेरे दिल का बसेरा नहीं है।
पता है मुझे भी वो मेरा नहीं है।

अँधेरा ही महमान है मेरे घर का
मुकद्दर में लिख्खा सवेरा नहीं है।

भरोसा रखा कर ज़माने पे कुछ दिल
बशर हर जहां में लुटेरा नहीं है।

अकेला नहीं दिल परेशाँ तू जग में.
दुखों ने यहाँ किसको घेरा नहीं है।

चले जायेंगे छोड़ महमान हैं सब
सदा के लिये जग ये डेरा नहीं है।

कहीं कुछ कमी है दुआओं में *हीरा*
जो पूरा कोई ख्वाब तेरा नहीं है।

                   हीरालाल

Tuesday, April 16, 2019

अनंगशेखर छंद :- नीतेन्द्र सिंह परमार भारत

🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

*अनंगशेखर छंद*

शिल्प : जगण रगण जगण रगण जगण गुरु
16 वर्ण, दो दो चरण समतुकांत
121 212 121 212  121  2

प्रवाह में  चली  नदी अपार  नीर से भरी।
भरे  समुद्र  ताल  और भूमि को करे हरी।।
चले चलो बिना  रुके  कहे सुहावनी नदी।
प्रणाम लक्ष्य को करे सदा लुभावनी नदी।।

नीतेन्द्र सिंह परमार " भारत "
छतरपुर  ( मध्यप्रदेश )

🍁 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

Saturday, March 30, 2019

आ० हीरालाल यादव जी

*ग़ज़ल*
221 2121 1221 212

इन्सानियत का पाठ पढ़ाने की बात हो।
नफ़रत सभी दिलों से मिटाने की बात हो।

रोने  की  बात  हो न रुलाने की बात हो।
ख़ुशहाल ज़िन्दगी को बनाने की बात हो।

दीमक  के  जैसे  चाट  रहें हैं  जो एकता
नाम-ओ-निशान उनका मिटाने की बात हो।

रखती  है  दूर  आदमी  को  आदमी से जो
नफ़रत की वो दीवार  गिराने  की  बात हो।

आयेंगे  वो  न  बाज  ये जब जानते हैं हम
क्यों दुश्मनों से हाथ मिलाने की बात हो।

ख्वाबों में जी रहा ये पड़ोसी जो मुल्क है
अब आइना इसे भी दिखाने की बात हो।

*हीरा*  करेंगे   बात  सितारों   की  बाद  में
भूखों की पहले भूख मिटाने की बात हो।

               हीरालाल

आ० हीरालाल यादव जी

*ग़ज़ल*
1222 1222 122

नशे  में  मूँद  कर  आँखें  पड़े  हैं।
सियासत में जो ये चिकने घड़े हैं।

जुगत कर के जो कुर्सी पर हैं बैठे
उन्हें  लगता  है वो मोती जड़े हैं।

नज़र  आती  नहीं  है राह कोई
ये कैसे मोड़ पर हम आ खड़े हैं।

नहीं   बदलेंगे   यूँ  हालात  यारो
हमीं  को  फैसले  लेने  कड़े  हैं।

सुलह  का रास्ता निकलेगा कैसे
जो जिद पर आप हम दोनो अड़े हैं।

सदाकत  की  चुनी है राह *हीरा*
तभी दुनिया की नज़रों में गड़े हैं।

                   हीरालाल

Friday, March 29, 2019

आ० शिव गोविंद सिंह गीत

.             *गीत सुहाने*
तर्ज:-किसी का घर द्वार न छूटे
--------------------------------------------
चंचल ,चतुर ,चपल कहते है,
                  आते जाते लोग।।
पर हम तेरी राह निहारे,
                   ये कैसा संयोग।।

सनम हम तुम्हे पुकारे ।
          तुम्हारी राह निहारे।।
               *(१)*
रुत आई है बसन्ती,
    पर अब तक तुम न आये।।
कोयल गीत सुनाती,
                  आम रहे बौराये।।
मंद पवन की महके खुशबु,
      पर हमको लगा वियोग..

सनम हम तुम्हे पुकारें,
            तुम्हारी राह निहारे।।
                 *(२)*
चिड़िये चहक रही है,
          फर फर पंख फैलाये।।
कल कल बहती नदियां,
             प्रकृति प्रेम दरषाये।।
दर दर माथा टेक रहे है,
           प्रभु को लगाये भोग...

सनम हम तुम्हे पुकारे,
          तुम्हारी राह निहारे ।।
                 *(३)*
पूछ रही है सखियाँ ,
                पूछ रहे घरबाले।।
कैसे उन्हे बताये,
   हम पी गये प्यार के प्याले।।
मन जोगन की को पहचाने,
             लगा प्रेम को रोग....

सनम हम तुम्हे पुकारे,
           तुम्हारी राह निहारे ।।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••
  🌹 *शिव गोविन्द सिंह*🌹

अनंगशेखर छंद नीतेन्द्र सिंह परमार भारत

🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

*अनंगशेखर छंद*
शिल्प : जगण रगण जगण रगण जगण गुरु
16 वर्ण, दो दो चरण समतुकांत
121 212 121 212  121  2

निहार लीजिये  हिया विकार मुक्त हों अभी।
सुधार  लीजिये  सुनों विचार  युक्त हों सभी।।
बनी  रहे  कृपालु  आपकी   कृपा   सुहावने।
निहारते    रहें    सदैव    सोमजू    लुभावने।।

नीतेन्द्र सिंह परमार " भारत "
छतरपुर  ( मध्यप्रदेश )

🍁 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

Thursday, March 28, 2019

डायलॉग नम्बर एक

*डायलॉग* _नम्बर एक_

रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप होते हैं।

नाम है भारत।

*किस देश ने किस देश से कहा ?*

नीतेन्द्र सिंह परमार " भारत "
छतरपुर  ( मध्यप्रदेश )
सम्पर्क सूत्र:- 8109643725

आ० हीरालाल यादव जी

*ग़ज़ल*
2122 1212 22

आज कल खो रहा मेरा दिल है।
आपका हो  रहा मेरा  दिल है।

चैन  से  ओ  सुकून  से  अपने
हाथ ख़ुद धो रहा मेरा दिल है।

अपने हाथों से  अपनी राहों में
काँटे खुद बो रहा मेरा दिल है।

क्या है दुनिया, है  भूल  बैठा ये
रात-दिन सो रहा मेरा दिल है।

याद आई है आज फिर उसकी
आज फिर रो रहा मेरा दिल है।

अपनी नाकामियों का ग़म *हीरा*
कांधों  पे ढो  रहा मेरा दिल है।
                   हीरालाल

Wednesday, March 27, 2019

आ० हीरालाल यादव जी

*ग़ज़ल*
122 122 122 122
भला  जानते  हैं,  बुरा  जानते  हैं।
ज़माने   तेरी   हर  अदा जानते हैं।

यकीं कैसे कर लें ज़माने पे हम यूँ
ज़माना   करेगा   दगा   जानते है।

गले  मिल  रहा है बड़े प्यार से पर
तू काटेगा इक दिन गला जानते हैं।

लगा  ले  भले लाख चेहरे पे चेहरा
तुझे  खूब  हम  बेवफ़ा  जानते  हैं।

सुखों  की तमन्ना  करें भी तो कैसे
है  जीवन  दुखों  से भरा जानते हैं।

करें चाँद  तारों  की क्योंकर तमन्ना
मुकद्दर का जब हम लिखा जानते हैं।

किसे दोष दें हम तबाही की अपनी
हमारी  ही  है  सब  ख़ता जानते हैं।

उन्हीं  की  है बजती ज़माने में तूती
जो दिल जीतने की कला जानते हैं।

इबादत  ख़ुदा  की भला कैसे छोड़ें
दुखों  की  यही इक दवा जानते हैं।

नहीं  छोड़ते  आस जीने की *हीरा*
उबारेगा  दुख  से  ख़ुदा जानते  हैं।

                   हीरालाल

तांका

प्रस्तुत तांका...... ॐ जय माँ शारदा......!
तांका विधा की जानकारी --- तांका का शाब्दिक अर्थ हैं - *लघु गीत* या *छोटी कविता* जो मात्र 31 वर्ण में सम्पूर्ण हो जाती है। यह जापानी विधा 05, 07, 05, 07, 07 के वर्णानुशासन  से बँधी हुई पंचपदी कविता हैं जिसका भाव पहली से पांचवी पंक्ति तक बना रहता हैं। अंतिम दो पंक्ति में तुकांत मिल जाये तो सोने पे सुहागा। लयविहीन काव्यगुण से शून्य रचना, छंद का शरीर धारण करने मात्र से तांका नहीं बन सकती।

"तांका"

गाँव के गाँव
वीरान खलिहान
सूखते वृक्ष
संध्या संग प्रदीप
टिमटिमाते दीप।।

अधूरे ख्वाब
लुढ़कती जिंदगी
जीने की आशा
संध्या सरोज सगी
उम्र ढलने लगी।।

महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अहीर छंद नीतेन्द्र सिंह परमार भारत

*◆अहीर छंद◆*

विधान~प्रति चरण 11 मात्राएँ,
            चरणान्त जगण(121),
             [दो दो चरण तुकांत।]

जीवन सरल सुजान।
कहते वेद - पुरान।।
        सीमा अड़ा जवान।
         खेतों खड़ा किसान।।

खोना नही विवेक।
संकट भले अनेक।।
    दाता हृदय विशाल।
    मन को करे निहाल।।

नीतेन्द्र सिंह परमार " भारत "
छतरपुर  ( मध्यप्रदेश )
सम्पर्क सूत्र:- 8109643725

Sunday, March 24, 2019

प्रमाण पत्र होली उत्सव

☘☘ *विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत* ☘☘
       🎍🎍 *_सम्मान समारोह_* 🎍🎍
                
समस्त काव्य मनीषियों को अत्यंत हर्ष के साथ सूचित किया जा रहा है कि *विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत* के तत्वाधान में होली पर्व की पूर्व सन्ध्या *दिनांक 19 मार्च* को विश्व जनचेतना ट्रस्ट के आभासी पटल *"जय जय काव्य चित्रशाला"* पर  प्रतिभागियों को ऑनलाइन काव्य सम्मेलन के सफलतम भव्य आयोजन हेतु सम्मान पत्र से सम्मानित करने का क्रम सुनियोजित हुआ है|
          
*दिनांक- 24 मार्च दिन ~ रविवार*
को *जय जय काव्य चित्रशाला पटल*
पर *सन्ध्या - 7:00.. बजे*
            
*मुख्य आथित्य ~ आद. कौशल कुमार पाण्डेय "आस" जी* 
     
*विशिष्ट आथित्य  ~ आद. सुशीला धस्माना "मुस्कान" जी*

_सम्मान पत्र प्रदाता_~
👉 *आद. डॉ. राहुल शुक्ल "साहिल" जी*
👉 *आद. नमन जैन "अद्वितीय" जी*
👉 *आद. ममता सिंह राठौर मीत जी*
👉 *आद. दिलीप कुमार पाठक 'सरस' जी*

🌹🌹🌹🌹  _निवेदक_    🌹🌹🌹🌹
  🙏    *_विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत_*     🙏
🙏🙏🙏🙏   *_जय जय_* 🙏🙏🙏🙏
[24/03, 3:26 p.m.] साहिल दादा: 🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀
*सम्मान पत्र प्रदाता~~ डॉ० राहुल शुक्ल 'साहिल'*

आ० रीता सिंह रीत जी
आ० शैलेन्द्र खरे 'सोम' गुरुदेव जी
आ० सन्तोष कुमार 'प्रीत' जी
आ० शीतल प्रसाद बोपचे जी
आ० शिवम दीक्षित 'दादा'
आ० एस० के० कपूर श्रीहंस जी
आ० सुशीला धस्माना 'मुस्कान' जी
आ० तेजराम नायक जी
आ० तुलाराम अनुरागी व्योम जी
आ० विश्वेश्वर शास्त्री 'विशेष'जी
आ० विवेक राज मिश्र जी

*सभी महानुभावों को सम्मान प्राप्ति हेतु हृदय तल से बधाई एवं शुभकामनाएँ*
[24/03, 3:27 p.m.] साहिल दादा: सम्मान पत्र प्रदाता~
*आ० दिलीप कुमार पाठक 'सरस' जी~~*

आ० लियाकत अली 'जलज' जी
आ० मधु गौड़ "दिव्या" जी
आ० ममता सिंह राठौर मीत जी
आ० नमन जैन अद्वितीय
आ० नेहा चाचरा बहल जी
आ० नीतेन्द्र सिंह परमार 'भारत' जी
आ० ओम प्रकाश फुलारा प्रफुल्ल जी
आ० राकेश राज पार्थ
आ० रश्मि वर्मा 'रश'
आ० रवि रश्मि अनुभूति जी
आ० साधना कृष्ण जी,

*सभी गुणिजनों को _"प्रह्लाद अनुराग सम्मान"_ प्राप्ति हेतु हृदय तल से बधाई एवं शुभकामनाएँ*
[24/03, 3:28 p.m.] साहिल दादा: सम्मान पत्र प्रदाता~
*आ० नमन जैन 'अद्वितीय' जी~~*

आ० राहुल शुक्ल 'साहिल' जी
आ० द्वारका प्रसाद पाराश
आ० हरीश बिष्ट जी
आ० हीरा लाल यादव जी
आ० इन्दु शर्मा शचि दीदी
आ० इन्दु शर्मा मेधा जी
आ०  जय अवस्थी
आ०  जय कान्त पाठक जी
आ० कौशल कुमार पाण्डेय जी

*सभी गुणिजनों को _"प्रह्लाद अनुराग सम्मान"_ प्राप्ति हेतु हृदय तल से बधाई एवं शुभकामनाएँ*
[24/03, 3:28 p.m.] साहिल दादा: *सम्मान पत्र प्रदाता~~ आ० ममता सिंह राठौर मीत जी*

आ० आदेश कुमार पंकज जी
आ० आकाश यादव कातिल जी
आ० आलोक सैनी जी
आ० भुवन बिष्ट जी
आ० विनोद कुमार हंसौड़ा जी
आ० दिलीप कुमार पाठक 'सरस' जी
आ० बृजमोहन साथी जी

*सभी गुणिजनों को प्रह्लाद अनुराग सम्मान प्राप्ति हेतु हृदय तल से बधाई एवं|*

_सम्मान पत्र प्रदाता_~
👉 *आद. डॉ. राहुल शुक्ल "साहिल" जी*
👉 *आद. नमन जैन "अद्वितीय" जी*
👉 *आद. ममता सिंह राठौर मीत जी*
👉 *आद. दिलीप कुमार पाठक 'सरस' जी*

*सभी प्रदाताओं के सम्मान पत्र इनबाक्स में भेज दिए गए हैं|*
किसी भी प्रदाता की अनुपस्थिति में सम्मान पत्र का वितरण आ० शीतल प्रसाद बोपचे जी करें तो अति कृपा होगी|
     🙏🙏 जय जय

आ० हीरालाल यादव जी

*ग़ज़ल*
1222 1222 122

जिगर  में  हौसला  रख्खा करो तुम।
न  यूँ  हर  बात  पर  रोया करो  तुम।

जुबाँ  से  बात हर कहना है मुश्किल
कहें  आँखें  जो वो समझा करो तुम।

न  दिल  माने  जिसे वो काम कर के
न  अपने  आप  से  धोखा करो तुम।

करो  परवाह   ख़ुद  की ठीक है, पर
कभी दुनिया की भी सोचा करो तुम।

मिला पाओगे क्या तुम ख़ुद से नज़रें
न   यूँ   ईमान   का  सौदा करो तुम।

करो  जो  भी  हुआ  स्वीकार  *हीरा*
हकीकत से न मुँह मोड़ा करो तुम।

                   हीरालाल

Saturday, March 23, 2019

पर्यायवाची शब्द

सभी कवियों और साहित्यकारों को ऐसी जानकारी रखनी चाहिए

*पर्यायवाची शब्द*

*जिन शब्दों के अर्थ में समानता होती है, उन्हें समानार्थक, समानार्थी या पर्यायवाची शब्द कहते हैं.*

*अ🎋👇👇*

अग्नि – आग, अनल, पावक.
अपमान – अनादर, अवज्ञा, अवहेलना, तिरस्कार.
अलंकार – आभूषण, गहना, जेवर.
अहंकार – दंभ, अभिमान, दर्प, मद, घमंड.
अमृत – सुधा, अमिय, पीयूष, सोम.
असुर – दैत्य, दानव, राक्षस, निशाचर, रजनीचर, दनुज, रात्रिचर, तमचर.
अतिथि – मेहमान, अभ्यागत, आगन्तुक.
अनुपम – अपूर्भ, अतुल्य, अनोखा, अद्भुत, अनन्य.
अर्थ – धन, द्रव्य, मुद्रा, दौलत, वित्त, पैसा.
अश्व – हय, तुरंग, घोड़ा, घोटक, बाजि, सैन्धव.
अंधकार – तम, तिमिर, अँधेरा, तमस, अंधियारा.

*आ🎋👇👇*

आम – रसाल, आम्र, सौरभ, अमृतफल

आग – अग्नि, अनल, हुतासन, पावक, कृशानु, वहनि, शिखी, वह्नि.
आँख – लोचन, नयन, नेत्र, चक्षु, दृष्टि.
आकाश – नभ, गगन, अम्बर, व्योम, आसमान, अर्श.
आनंद – हर्ष, सुख, आमोद, मोद, प्रमोद, उल्लास.
आश्रम – कुटी, विहार, मठ, संघ, अखाड़ा.
आंसू – नेत्रजल, नयनजल, चक्षुजल, अश्रु.
आत्मा – जीव, चैतन्य, चेतनतत्तव, अंतःकरण.

*इ🎋👇👇*

इच्छा – अभिलाषा, चाह, कामना, लालसा, मनोरथ, आकांक्षा, अभीष्ट.
इन्द्र – सुरेश, सुरेन्द्र, देवेन्द्र, सुरपति, शक्र, पुरंदर, देवराज, महेन्द्र, शचीपति.
इन्द्राणि – इन्द्रवधू, मधवानी, शची, शतावरी, पोलोमी.

*ई🎋👇👇*

ईश्वर – परमात्मा, प्रभु, ईश, जगदीश, भगवान, परमेश्वर, जगदीश्वर, विधाता.

*उ🎋👇👇*

उपवन – बाग़, बगीचा, उद्यान, वाटिका, गुलशन.
उक्ति – कथन, वचन, सूक्ति.
उग्र – प्रचण्ड, उत्कट, तेज, तीव्र, विकट.
उचित – ठीक, मुनासिब, वाज़िब, समुचित, युक्तिसंगत, न्यायसंगत, तर्कसंगत.
उच्छृंखल – उद्दंड, अक्खड़, आवारा, निरकुंश, मनमर्जी, स्वेच्छाचारी.
उज्जड़ – अशिष्ट, असभ्य, गँवार, जंगली, देहाती, उद्दंड, निरकुंश.
उजला – उज्ज्वल, श्वेत, सफ़ेद, धवल.
उजाड़ – जंगल, बियावान, वन.
उजाला – प्रकाश, रोशनी, चाँदनी.
उत्कर्ष – समृद्धि, उन्नति, प्रगति, उठान.
उत्कृष्ट – उत्तम, उन्नत, श्रेष्ठ, अच्छा, बढ़िया, उम्दा.
उत्कोच – घूस, रिश्वत.
उत्पत्ति – उद्गम, पैदाइश, जन्म, उद्भव, सृष्टि, आविर्भाव, उदय.
उद्धार – मुक्ति, छुटकारा, निस्तार.
उपाय – युक्ति, साधन, तरकीब, तदबीर, यत्न, प्रयत्न.

*ऊ🎋👇👇*

ऊधम – उपद्रव, उत्पात, धूम, हुल्लड़, हुड़दंग, धमाचौकड़ी.

*ए🎋👇👇*

ऐक्य – एकत्व, एका, एकता, मेल.
ऐश्वर्य – समृद्धि, विभूति.

*ओ🎋👇👇*
ओज – तेज, शक्ति, बल, वीर्य.
ओंठ- ओष्ठ, अधर, होंठ.

*औ🎋👇👇*
औचक – अचानक, यकायक, सहसा.
औरत – स्त्री, जोरू, घरनी, घरवाली.

*ऋ🎋👇👇*

ऋषि – मुनि, साधु, यति, संन्यासी, तत्वज्ञ, तपस्वी.

*क🎋👇👇*

कच – बाल, केश, कुन्तल, चिकुर, अलक, रोम, शिरोरूह.
कमल- नलिन, अरविंद, उत्पल, राजीव, पद्म, पंकज, नीरज, सरोज, जलज, जलजात, शतदल, पुण्डरीक, इन्दीवर.
कबूतर – कपोत, रक्तलोचन, पारावत.
कामदेव – मदन, मनोज, अनंग, काम, रतिपति, पुष्पधन्वा, मन्मथ.
कण्ठ – ग्रीवा, गर्दन, गला.
कृपा – प्रसाद, करुणा, दया, अनुग्रह.
किताब – पोथी, ग्रन्थ, पुस्तक.
किनारा – तीर, कूल, कगार, तट.
कपड़ा – चीर, वसन, पट, वस्त्र, परिधान.
किरण – ज्योति, प्रभा, रश्मि, दीप्ति.
किसान – कृषक, भूमिपुत्र, हलधर, खेतिहर, अन्नदाता.
कृष्ण – राधापति, घनश्याम, वासुदेव, माधव, मोहन, केशव, गोविन्द, गिरधारी.
कान – कर्ण, श्रुति, श्रुतिपटल, श्रवण श्रोत, श्रुतिपुट.
कोयल – कोकिला, पिक, काकपाली, बसंतदूत, सारिका, कुहुकिनी, वनप्रिया.
क्रोध – रोष, कोप, अमर्ष, कोह, प्रतिघात.
कीर्ति – यश, प्रसिद्धि.

*ख🎋👇👇*

खग – पक्षी, विहग, नभचर, अण्डज, पखेरू.
खंभा – स्तूप, स्तम्भ, खंभ.
खल – दुर्जन, दुष्ट, घूर्त, कुटिल.
खून – रक्त, लहू, शोणित, रुधिर.

*ग🎋👇👇*

गज – हाथी, हस्ती, मतंग, कूम्भा, मदकल .
गाय – गौ, धेनु, भद्रा.
गंगा – देवनदी, मंदाकिनी, भगीरथी, विश्नुपगा, देवपगा, देवनदी, जाह्नवी, त्रिपथगा.
गणेश – विनायक, गजानन, गौरीनंदन, गणपति, गणनायक, शंकरसुवन, लम्बोदर, एकदन्त.
गृह – घर, सदन, भवन, धाम, निकेतन, निवास, आलय, आवास.
गर्मी – ताप, ग्रीष्म, ऊष्मा, गरमी.
गुरु – शिक्षक, आचार्य, उपाध्याय.

*घ🎋👇👇*
घट – घड़ा, कलश, कुम्भ, निप.
घर – आलय, आवास, गृह, निकेतन, निवास, भवन, वास, वास-स्थान, शाला, सदन.
घृत – घी, अमृत, नवनीत.
घास – तृण, दूर्वा, दूब, कुश.
*च🎋👇👇*
चरण – पद, पग, पाँव, पैर, पाद.
चतुर – विज्ञ, निपुण, नागर, पटु, कुशल, दक्ष, प्रवीण, योग्य.
चंद्रमा – चाँद, चन्द्र, शशि, रजनीश, निशानाथ, सोम, कलानिधि.
चाँदनी – चन्द्रिका, कौमुदी, ज्योत्सना, चन्द्रमरीचि, उजियारी, चन्द्रप्रभा, जुन्हाई.
चाँदी – रजत, सौध, रूपा, रूपक, रौप्य, चन्द्रहास.
चोटी – मूर्धा, सानु, शृंग.

*छ🎋👇👇*

छतरी – छत्र, छाता.
छली – छलिया, कपटी, धोखेबाज.
छवि – शोभा, सौंदर्य, कान्ति, प्रभा.
छानबीन – जाँच, पूछताछ, खोज, अन्वेषण, शोध.
छैला – सजीला, बाँका, शौकीन.
छोर – नोक, कोर, किनारा, सिरा.

*ज🎋👇👇*
जल – सलिल, वारि, नीर, तोय, अम्बु, पानी, पय, पेय.
जगत – संसार, विश्व, जग, भव, दुनिया, लोक.
जीभ – रसज्ञा, जिह्वा, वाणी, वाचा, जबान.
जंगल – कानन, वन, अरण्य, गहन, कांतार, बीहड़, विटप.
जेवर – गहना, अलंकार, भूषण.
ज्योति – आभा, छवि, द्युति, दीप्ति, प्रभा.
*झ🎋👇👇
झूठ – असत्य, मिथ्या.
झण्डा - ध्वजा परचम पताका
त🎋👇👇
तरुवर – वृक्ष, पेड़, द्रुम, तरु, पादप.
तलवार – असि, कृपाण, करवाल, चन्द्रहास.
तालाब – सरोवर, जलाशय, पुष्कर, पोखरा.
तीर – शर, बाण, अनी, सायक.

*द🎋👇👇*
दास – सेवक, नौकर, चाकर, अनुचर, भृत्य.
दधि – दही, गोरस, मट्ठा.
दरिद्र – निर्धन, ग़रीब, रंक, कंगाल, दीन.
दिन – दिवस, याम, दिवा, वार.
दीन – ग़रीब, दरिद्र, रंक, अकिंचन, निर्धन, कंगाल.
दीपक – दीप, दीया, प्रदीप.
दुःख – पीड़ा,कष्ट, व्यथा, वेदना, संताप, शोक, खेद, पीर.
दूध – दुग्ध, क्षीर, पय, गौरस, स्तन्य.
दुष्ट – पापी, नीच, दुर्जन, अधम, खल, पामर.
दाँत – दन्त.
दर्पण – शीशा, आरसी, आईना.
दुर्गा – चंडिका, भवानी, कल्याणी, महागौरी, कालिका, शिवा, चण्डी, चामुण्डा.
देवता – सुर, देव.
देह – काया, तन, शरीर.

*ध🎋👇👇*
धन – दौलत, संपत्ति, सम्पदा, वित्त.
धरती – धरा, धरती, वसुधा, ज़मीन, पृथ्वी, भू, भूमि, धरणी, वसुंधरा, अचला, मही, रत्नगर्भा.
धनुष – चाप, शरासन, कमान, कोदंड, धनु.

*न🎋👇👇*

नदी – सरिता, तटिनी, सरि, सारंग, तरंगिणी, दरिया, निर्झरिणी.
नया – नूतन, नव, नवीन, नव्य.
नाव – नौका, तरणी, तरी.

*प🎋👇👇*
पवन – वायु, हवा, समीर, वात, मारुत, अनिल.
पहाड़ – पर्वत, गिरि, अचल, शैल, भूधर, महीधर.
पक्षी – खेचर, दविज, पतंग, पंछी, खग, चिड़िया, गगनचर, पखेरू, विहंग, नभचर.
पति – स्वामी, प्राणाधार, प्राणप्रिय, प्राणेश.
पत्नी – भार्या, वधू, वामा, अर्धांगिनी, सहधर्मिणी, गृहणी, बहु, वनिता, दारा, जोरू, वामांगिनी.
पुत्र – बेटा, आत्मज, सुत, वत्स, तनुज, तनय, नंदन.
पुत्री – बेटी, आत्मजा, तनूजा, सुता, तनया.
पुष्प – फूल, सुमन, कुसुम, मंजरी, प्रसून.

*फ🎋👇👇*

फूल – पुष्प, सुमन, कुसुम, गुल, प्रसून.

*ब🎋👇👇*

बादल – मेघ, घन, जलधर, जलद, वारिद, पयोधर.
बालू – रेत, बालुका, सैकत.
बन्दर – वानर, कपि, हरि.
बिजली – घनप्रिया, इन्द्र्वज्र, चंचला, सौदामनी, चपला, दामिनी, तड़ित, विद्युत.
बगीचा – बाग़, वाटिका, उपवन, उद्यान, फुलवारी, बगिया.
बाण – सर, तीर, सायक, विशिख.
बाल – कच, केश, चिकुर, चूल.
ब्रह्मा – विधाता, स्वयंभू, प्रजापति, पितामह, चतुरानन, विरंचि, अज.
बलदेव – बलराम, बलभद्र, हलायुध, रोहिणेय.
बहुत – अनेक, अतीव, अति, बहुल, प्रचुर, अपरिमित, प्रभूत, अपार, अमित, अत्यन्त, असंख्य.
ब्राह्मण – द्विज, भूदेव, विप्र, महीदेव, भूमिसुर, भूमिदेव.

*भ🎋👇👇*

भय – भीति, डर, विभीषिका.
भाई – तात, अनुज, अग्रज, भ्राता, भ्रातृ.
भूषण – जेवर, गहना, आभूषण, अलंकार.
भौंरा – मधुप, मधुकर, द्विरेप, अलि, षट्पद, भृंग, भ्रमर.

*म🎋👇👇*
मनुष्य – आदमी, नर, मानव, मानुष, मनुज.
मदिरा – शराब, हाला, आसव, मद.
मोर – कलापी, नीलकंठ, नर्तकप्रिय.
मधु – शहद, रसा, शहद.
मृग – हिरण, सारंग, कृष्णसार.
मछली – मीन, मत्स्य, जलजीवन, शफरी, मकर.
माता – जननी, माँ, अंबा, जनयत्री, अम्मा.
मित्र – सखा, सहचर, साथी, दोस्त.

*य🎋👇👇*
यम – सूर्यपुत्र, जीवितेश, कृतांत, अन्तक, दण्डधर, कीनाश, यमराज.
यमुना – कालिन्दी, सूर्यसुता, रवितनया, तरणि-तनूजा, तरणिजा, अर्कजा, भानुजा.
युवति – युवती, सुन्दरी, श्यामा, किशोरी, तरुणी, नवयौवना.

*र🎋👇👇*
रमा – इन्दिरा, हरिप्रिया, श्री, लक्ष्मी, कमला, पद्मा, पद्मासना, समुद्रजा, श्रीभार्गवी, क्षीरोदतनया.
रात – रात्रि, रैन, रजनी, निशा, यामिनी, निशि, यामा, विभावरी.
राजा – नृप, नृपति, भूपति, नरपति, भूपाल, नरेश, महीपति, अवनीपति.
रात्रि – निशा, रैन, रात, यामिनी, शर्वरी, तमस्विनी, विभावरी.
रामचन्द्र – सीतापति, राघव, रघुपति, रघुवर, रघुनाथ, रघुराज, रघुवीर,  जानकीवल्लभ, कौशल्यानन्दन.
रावण – दशानन, लंकेश, लंकापति, दशशीश, दशकंध.
राधिका – राधा, ब्रजरानी, हरिप्रिया, वृषभानुजा.

*ल🎋👇👇*
लड़का – बालक, शिशु, सुत, किशोर, कुमार.
लड़की – बालिका, कुमारी, सुता, किशोरी, बाला, कन्या.
लक्ष्मी – कमला, पद्मा, रमा, हरिप्रिया, श्री, इंदिरा, पद्मजा, सिन्धुसुता, कमलासना.
लक्ष्मण – लखन, शेषावतार, सौमित्र, रामानुज, शेष.
लौह – अयस, लोहा, सार.
लता – बल्लरी, बल्ली, बेली.
*व🎋👇👇*
वायु – हवा, पवन, समीर, अनिल, वात, मारुत.
वसन – अम्बर, वस्त्र, परिधान, पट, चीर.
विधवा – अनाथा, पतिहीना.
विष – ज़हर, हलाहल, गरल, कालकूट.
वृक्ष – पेड़, पादप, विटप, तरू, गाछ, दरख्त, शाखी, विटप, द्रुम.
विष्णु – नारायण, चक्रपाणी.
विश्व – जगत, जग, भव, संसार, लोक, दुनिया.
विद्युत – चपला, चंचला, दामिनी, सौदामिनी, तड़ित, बीजुरी, घनवल्ली, क्षणप्रभा, करका.
बारिश – वर्षण, वृष्टि, वर्षा, पावस, बरसात.
वीर्य – जीवन, सार, तेज, शुक्र, बीज.
वज्र – कुलिस, पवि, अशनि, दभोलि.
विशाल – विराट, दीर्घ, वृहत, बड़ा, महान.
वृक्ष – गाछ, तरु, पेड़, द्रुम, पादप, विटप, शाखी.

*श🎋👇👇*
शिव – भोलेनाथ, शम्भू, त्रिलोचन, महादेव, नीलकंठ, शंकर.
शरीर – देह, तनु, काया, कलेवर, अंग, गात.
शत्रु – रिपु, दुश्मन, अमित्र, वैरी, अरि, विपक्षी.
शिक्षक – गुरु, अध्यापक, आचार्य, उपाध्याय.
शेर – केहरि, केशरी, वनराज, सिंह.
शेषनाग – अहि, नाग, भुजंग, व्याल, उरग, पन्नग, फणीश, सारंग.
शुभ्र – गौर, श्वेत, अमल, वलक्ष, शुक्ल, अवदात.
शहद – पुष्परस, मधु, आसव, रस, मकरन्द.
*ष🎋👇👇*
षंड – हीजड़ा, नपुंसक, नामर्द.
षडानन – षटमुख, कार्तिकेय, षाण्मातुर.

*👇👇स🎋*
सीता – वैदेही, जानकी, भूमिजा, जनकतनया, जनकनन्दिनी, रामप्रिया.
साँप – अहि, भुजंग, ब्याल, सर्प, नाग, विषधर, उरग, पवनासन.
सूर्य – रवि, सूरज, दिनकर, प्रभाकर, आदित्य, दिनेश, भास्कर, दिनकर, दिवाकर, भानु, आदित्य.
संसार – जग, विश्व, जगत, लोक, दुनिया.
सोना – स्वर्ण, कंचन, कनक, हेम, कुंदन.
सिंह – केसरी, शेर, मृगपति, वनराज, शार्दूल, नाहर, सारंग, मृगराज.
समुद्र – सागर, पयोधि, उदधि, पारावार, नदीश, जलधि, सिंधु, रत्नाकर, वारिधि.
सम – सर्व, समस्त, सम्पूर्ण, पूर्ण, समग्र, अखिल, निखिल.
समीप – सन्निकट, आसन्न, निकट, पास.
समूह – दल, झुंड, समुदाय, टोली, जत्था, मण्डली, वृंद, गण, पुंज, संघ, समुच्चय.
सभा – अधिवेशन, संगीति, परिषद, बैठक, महासभा.
सुन्दर – कलित, ललाम, मंजुल, रुचिर, चारु, रम्य, मनोहर, सुहावना, चित्ताकर्षक, रमणीक, कमनीय, उत्कृष्ट, उत्तम, सुरम्य.
सन्ध्या – सायंकाल, शाम, साँझ, प्रदोषकाल, गोधूलि.
स्त्री – सुन्दरी, कान्ता, कलत्र, वनिता, नारी, महिला, अबला, ललना, औरत, कामिनी, रमणी.
सुगंधि – सौरभ, सुरभि, महक, खुशबू.
स्वर्ग – सुरलोक, देवलोक, दिव्यधाम, ब्रह्मधाम, द्यौ, परमधाम, त्रिदिव, दयुलोक.
स्वर्ण – सुवर्ण, कंचन, हेन, हारक, जातरूप, सोना, तामरस, हिरण्य.
सरस्वती – गिरा, शारदा, भारती, वीणापाणि, विमला, वागीश, वागेश्वरी.
सहेली – आली, सखी, सहचरी, सजनी, सैरन्ध्री.
संसार – लोक, जग, जहान, जगत, विश्व.
*ह🎋*
हस्त – हाथ, कर, पाणि, बाहु, भुजा.
हिमालय – हिमगिरी, हिमाचल, गिरिराज, पर्वतराज, नगेश.
हिरण – सुरभी, कुरग, मृग, सारंग, हिरन.
होंठ – अक्षर, ओष्ठ, ओंठ.
हनुमान – पवनसुत, पवनकुमार, महावीर, रामदूत, मारुततनय, अंजनीपुत्र, आंजनेय, कपीश्वर, केशरीनंदन, बजरंगबली, मारुति.
हिमांशु – हिमकर, निशाकर, क्षपानाथ, चन्द्रमा, चन्द्र, निशिपति.
हंस – कलकंठ, मराल, सिपपक्ष,
मानसौक.
हृदय – छाती, वक्ष, वक्षस्थल, हिय, उर.
हाथ – हस्त, कर, पाणि.
हाथी – हस्ती, कुंजर, कूम्भा, मतंग, वारण, गज, द्विप, करी,*पर्यायवाची शब्द*

*जिन शब्दों के अर्थ में समानता होती है, उन्हें समानार्थक, समानार्थी या पर्यायवाची शब्द कहते हैं.*

*अ🎋👇👇*

अग्नि – आग, अनल, पावक.
अपमान – अनादर, अवज्ञा, अवहेलना, तिरस्कार.
अलंकार – आभूषण, गहना, जेवर.
अहंकार – दंभ, अभिमान, दर्प, मद, घमंड.
अमृत – सुधा, अमिय, पीयूष, सोम.
असुर – दैत्य, दानव, राक्षस, निशाचर, रजनीचर, दनुज, रात्रिचर, तमचर.
अतिथि – मेहमान, अभ्यागत, आगन्तुक.
अनुपम – अपूर्भ, अतुल्य, अनोखा, अद्भुत, अनन्य.
अर्थ – धन, द्रव्य, मुद्रा, दौलत, वित्त, पैसा.
अश्व – हय, तुरंग, घोड़ा, घोटक, बाजि, सैन्धव.
अंधकार – तम, तिमिर, अँधेरा, तमस, अंधियारा.

*आ🎋👇👇*

आम – रसाल, आम्र, सौरभ, अमृतफल

आग – अग्नि, अनल, हुतासन, पावक, कृशानु, वहनि, शिखी, वह्नि.
आँख – लोचन, नयन, नेत्र, चक्षु, दृष्टि.
आकाश – नभ, गगन, अम्बर, व्योम, आसमान, अर्श.
आनंद – हर्ष, सुख, आमोद, मोद, प्रमोद, उल्लास.
आश्रम – कुटी, विहार, मठ, संघ, अखाड़ा.
आंसू – नेत्रजल, नयनजल, चक्षुजल, अश्रु.
आत्मा – जीव, चैतन्य, चेतनतत्तव, अंतःकरण.

*इ🎋👇👇*

इच्छा – अभिलाषा, चाह, कामना, लालसा, मनोरथ, आकांक्षा, अभीष्ट.
इन्द्र – सुरेश, सुरेन्द्र, देवेन्द्र, सुरपति, शक्र, पुरंदर, देवराज, महेन्द्र, शचीपति.
इन्द्राणि – इन्द्रवधू, मधवानी, शची, शतावरी, पोलोमी.

*ई🎋👇👇*

ईश्वर – परमात्मा, प्रभु, ईश, जगदीश, भगवान, परमेश्वर, जगदीश्वर, विधाता.

*उ🎋👇👇*

उपवन – बाग़, बगीचा, उद्यान, वाटिका, गुलशन.
उक्ति – कथन, वचन, सूक्ति.
उग्र – प्रचण्ड, उत्कट, तेज, तीव्र, विकट.
उचित – ठीक, मुनासिब, वाज़िब, समुचित, युक्तिसंगत, न्यायसंगत, तर्कसंगत.
उच्छृंखल – उद्दंड, अक्खड़, आवारा, निरकुंश, मनमर्जी, स्वेच्छाचारी.
उज्जड़ – अशिष्ट, असभ्य, गँवार, जंगली, देहाती, उद्दंड, निरकुंश.
उजला – उज्ज्वल, श्वेत, सफ़ेद, धवल.
उजाड़ – जंगल, बियावान, वन.
उजाला – प्रकाश, रोशनी, चाँदनी.
उत्कर्ष – समृद्धि, उन्नति, प्रगति, उठान.
उत्कृष्ट – उत्तम, उन्नत, श्रेष्ठ, अच्छा, बढ़िया, उम्दा.
उत्कोच – घूस, रिश्वत.
उत्पत्ति – उद्गम, पैदाइश, जन्म, उद्भव, सृष्टि, आविर्भाव, उदय.
उद्धार – मुक्ति, छुटकारा, निस्तार.
उपाय – युक्ति, साधन, तरकीब, तदबीर, यत्न, प्रयत्न.

*ऊ🎋👇👇*

ऊधम – उपद्रव, उत्पात, धूम, हुल्लड़, हुड़दंग, धमाचौकड़ी.

*ए🎋👇👇*

ऐक्य – एकत्व, एका, एकता, मेल.
ऐश्वर्य – समृद्धि, विभूति.

*ओ🎋👇👇*
ओज – तेज, शक्ति, बल, वीर्य.
ओंठ- ओष्ठ, अधर, होंठ.

*औ🎋👇👇*
औचक – अचानक, यकायक, सहसा.
औरत – स्त्री, जोरू, घरनी, घरवाली.

*ऋ🎋👇👇*

ऋषि – मुनि, साधु, यति, संन्यासी, तत्वज्ञ, तपस्वी.

*क🎋👇👇*

कच – बाल, केश, कुन्तल, चिकुर, अलक, रोम, शिरोरूह.
कमल- नलिन, अरविंद, उत्पल, राजीव, पद्म, पंकज, नीरज, सरोज, जलज, जलजात, शतदल, पुण्डरीक, इन्दीवर.
कबूतर – कपोत, रक्तलोचन, पारावत.
कामदेव – मदन, मनोज, अनंग, काम, रतिपति, पुष्पधन्वा, मन्मथ.
कण्ठ – ग्रीवा, गर्दन, गला.
कृपा – प्रसाद, करुणा, दया, अनुग्रह.
किताब – पोथी, ग्रन्थ, पुस्तक.
किनारा – तीर, कूल, कगार, तट.
कपड़ा – चीर, वसन, पट, वस्त्र, परिधान.
किरण – ज्योति, प्रभा, रश्मि, दीप्ति.
किसान – कृषक, भूमिपुत्र, हलधर, खेतिहर, अन्नदाता.
कृष्ण – राधापति, घनश्याम, वासुदेव, माधव, मोहन, केशव, गोविन्द, गिरधारी.
कान – कर्ण, श्रुति, श्रुतिपटल, श्रवण श्रोत, श्रुतिपुट.
कोयल – कोकिला, पिक, काकपाली, बसंतदूत, सारिका, कुहुकिनी, वनप्रिया.
क्रोध – रोष, कोप, अमर्ष, कोह, प्रतिघात.
कीर्ति – यश, प्रसिद्धि.

*ख🎋👇👇*

खग – पक्षी, विहग, नभचर, अण्डज, पखेरू.
खंभा – स्तूप, स्तम्भ, खंभ.
खल – दुर्जन, दुष्ट, घूर्त, कुटिल.
खून – रक्त, लहू, शोणित, रुधिर.

*ग🎋👇👇*

गज – हाथी, हस्ती, मतंग, कूम्भा, मदकल .
गाय – गौ, धेनु, भद्रा.
गंगा – देवनदी, मंदाकिनी, भगीरथी, विश्नुपगा, देवपगा, देवनदी, जाह्नवी, त्रिपथगा.
गणेश – विनायक, गजानन, गौरीनंदन, गणपति, गणनायक, शंकरसुवन, लम्बोदर, एकदन्त.
गृह – घर, सदन, भवन, धाम, निकेतन, निवास, आलय, आवास.
गर्मी – ताप, ग्रीष्म, ऊष्मा, गरमी.
गुरु – शिक्षक, आचार्य, उपाध्याय.

*घ🎋👇👇*
घट – घड़ा, कलश, कुम्भ, निप.
घर – आलय, आवास, गृह, निकेतन, निवास, भवन, वास, वास-स्थान, शाला, सदन.
घृत – घी, अमृत, नवनीत.
घास – तृण, दूर्वा, दूब, कुश.
*च🎋👇👇*
चरण – पद, पग, पाँव, पैर, पाद.
चतुर – विज्ञ, निपुण, नागर, पटु, कुशल, दक्ष, प्रवीण, योग्य.
चंद्रमा – चाँद, चन्द्र, शशि, रजनीश, निशानाथ, सोम, कलानिधि.
चाँदनी – चन्द्रिका, कौमुदी, ज्योत्सना, चन्द्रमरीचि, उजियारी, चन्द्रप्रभा, जुन्हाई.
चाँदी – रजत, सौध, रूपा, रूपक, रौप्य, चन्द्रहास.
चोटी – मूर्धा, सानु, शृंग.

*छ🎋👇👇*

छतरी – छत्र, छाता.
छली – छलिया, कपटी, धोखेबाज.
छवि – शोभा, सौंदर्य, कान्ति, प्रभा.
छानबीन – जाँच, पूछताछ, खोज, अन्वेषण, शोध.
छैला – सजीला, बाँका, शौकीन.
छोर – नोक, कोर, किनारा, सिरा.

*ज🎋👇👇*
जल – सलिल, वारि, नीर, तोय, अम्बु, पानी, पय, पेय.
जगत – संसार, विश्व, जग, भव, दुनिया, लोक.
जीभ – रसज्ञा, जिह्वा, वाणी, वाचा, जबान.
जंगल – कानन, वन, अरण्य, गहन, कांतार, बीहड़, विटप.
जेवर – गहना, अलंकार, भूषण.
ज्योति – आभा, छवि, द्युति, दीप्ति, प्रभा.
*झ🎋👇👇
झूठ – असत्य, मिथ्या.
झण्डा - ध्वजा परचम पताका
त🎋👇👇
तरुवर – वृक्ष, पेड़, द्रुम, तरु, पादप.
तलवार – असि, कृपाण, करवाल, चन्द्रहास.
तालाब – सरोवर, जलाशय, पुष्कर, पोखरा.
तीर – शर, बाण, अनी, सायक.

*द🎋👇👇*
दास – सेवक, नौकर, चाकर, अनुचर, भृत्य.
दधि – दही, गोरस, मट्ठा.
दरिद्र – निर्धन, ग़रीब, रंक, कंगाल, दीन.
दिन – दिवस, याम, दिवा, वार.
दीन – ग़रीब, दरिद्र, रंक, अकिंचन, निर्धन, कंगाल.
दीपक – दीप, दीया, प्रदीप.
दुःख – पीड़ा,कष्ट, व्यथा, वेदना, संताप, शोक, खेद, पीर.
दूध – दुग्ध, क्षीर, पय, गौरस, स्तन्य.
दुष्ट – पापी, नीच, दुर्जन, अधम, खल, पामर.
दाँत – दन्त.
दर्पण – शीशा, आरसी, आईना.
दुर्गा – चंडिका, भवानी, कल्याणी, महागौरी, कालिका, शिवा, चण्डी, चामुण्डा.
देवता – सुर, देव.
देह – काया, तन, शरीर.

*ध🎋👇👇*
धन – दौलत, संपत्ति, सम्पदा, वित्त.
धरती – धरा, धरती, वसुधा, ज़मीन, पृथ्वी, भू, भूमि, धरणी, वसुंधरा, अचला, मही, रत्नगर्भा.
धनुष – चाप, शरासन, कमान, कोदंड, धनु.

*न🎋👇👇*

नदी – सरिता, तटिनी, सरि, सारंग, तरंगिणी, दरिया, निर्झरिणी.
नया – नूतन, नव, नवीन, नव्य.
नाव – नौका, तरणी, तरी.

*प🎋👇👇*
पवन – वायु, हवा, समीर, वात, मारुत, अनिल.
पहाड़ – पर्वत, गिरि, अचल, शैल, भूधर, महीधर.
पक्षी – खेचर, दविज, पतंग, पंछी, खग, चिड़िया, गगनचर, पखेरू, विहंग, नभचर.
पति – स्वामी, प्राणाधार, प्राणप्रिय, प्राणेश.
पत्नी – भार्या, वधू, वामा, अर्धांगिनी, सहधर्मिणी, गृहणी, बहु, वनिता, दारा, जोरू, वामांगिनी.
पुत्र – बेटा, आत्मज, सुत, वत्स, तनुज, तनय, नंदन.
पुत्री – बेटी, आत्मजा, तनूजा, सुता, तनया.
पुष्प – फूल, सुमन, कुसुम, मंजरी, प्रसून.

*फ🎋👇👇*

फूल – पुष्प, सुमन, कुसुम, गुल, प्रसून.

*ब🎋👇👇*

बादल – मेघ, घन, जलधर, जलद, वारिद, पयोधर.
बालू – रेत, बालुका, सैकत.
बन्दर – वानर, कपि, हरि.
बिजली – घनप्रिया, इन्द्र्वज्र, चंचला, सौदामनी, चपला, दामिनी, तड़ित, विद्युत.
बगीचा – बाग़, वाटिका, उपवन, उद्यान, फुलवारी, बगिया.
बाण – सर, तीर, सायक, विशिख.
बाल – कच, केश, चिकुर, चूल.
ब्रह्मा – विधाता, स्वयंभू, प्रजापति, पितामह, चतुरानन, विरंचि, अज.
बलदेव – बलराम, बलभद्र, हलायुध, रोहिणेय.
बहुत – अनेक, अतीव, अति, बहुल, प्रचुर, अपरिमित, प्रभूत, अपार, अमित, अत्यन्त, असंख्य.
ब्राह्मण – द्विज, भूदेव, विप्र, महीदेव, भूमिसुर, भूमिदेव.

*भ🎋👇👇*

भय – भीति, डर, विभीषिका.
भाई – तात, अनुज, अग्रज, भ्राता, भ्रातृ.
भूषण – जेवर, गहना, आभूषण, अलंकार.
भौंरा – मधुप, मधुकर, द्विरेप, अलि, षट्पद, भृंग, भ्रमर.

*म🎋👇👇*
मनुष्य – आदमी, नर, मानव, मानुष, मनुज.
मदिरा – शराब, हाला, आसव, मद.
मोर – कलापी, नीलकंठ, नर्तकप्रिय.
मधु – शहद, रसा, शहद.
मृग – हिरण, सारंग, कृष्णसार.
मछली – मीन, मत्स्य, जलजीवन, शफरी, मकर.
माता – जननी, माँ, अंबा, जनयत्री, अम्मा.
मित्र – सखा, सहचर, साथी, दोस्त.

*य🎋👇👇*
यम – सूर्यपुत्र, जीवितेश, कृतांत, अन्तक, दण्डधर, कीनाश, यमराज.
यमुना – कालिन्दी, सूर्यसुता, रवितनया, तरणि-तनूजा, तरणिजा, अर्कजा, भानुजा.
युवति – युवती, सुन्दरी, श्यामा, किशोरी, तरुणी, नवयौवना.

*र🎋👇👇*
रमा – इन्दिरा, हरिप्रिया, श्री, लक्ष्मी, कमला, पद्मा, पद्मासना, समुद्रजा, श्रीभार्गवी, क्षीरोदतनया.
रात – रात्रि, रैन, रजनी, निशा, यामिनी, निशि, यामा, विभावरी.
राजा – नृप, नृपति, भूपति, नरपति, भूपाल, नरेश, महीपति, अवनीपति.
रात्रि – निशा, रैन, रात, यामिनी, शर्वरी, तमस्विनी, विभावरी.
रामचन्द्र – सीतापति, राघव, रघुपति, रघुवर, रघुनाथ, रघुराज, रघुवीर,  जानकीवल्लभ, कौशल्यानन्दन.
रावण – दशानन, लंकेश, लंकापति, दशशीश, दशकंध.
राधिका – राधा, ब्रजरानी, हरिप्रिया, वृषभानुजा.

*ल🎋👇👇*
लड़का – बालक, शिशु, सुत, किशोर, कुमार.
लड़की – बालिका, कुमारी, सुता, किशोरी, बाला, कन्या.
लक्ष्मी – कमला, पद्मा, रमा, हरिप्रिया, श्री, इंदिरा, पद्मजा, सिन्धुसुता, कमलासना.
लक्ष्मण – लखन, शेषावतार, सौमित्र, रामानुज, शेष.
लौह – अयस, लोहा, सार.
लता – बल्लरी, बल्ली, बेली.
*व🎋👇👇*
वायु – हवा, पवन, समीर, अनिल, वात, मारुत.
वसन – अम्बर, वस्त्र, परिधान, पट, चीर.
विधवा – अनाथा, पतिहीना.
विष – ज़हर, हलाहल, गरल, कालकूट.
वृक्ष – पेड़, पादप, विटप, तरू, गाछ, दरख्त, शाखी, विटप, द्रुम.
विष्णु – नारायण, चक्रपाणी.
विश्व – जगत, जग, भव, संसार, लोक, दुनिया.
विद्युत – चपला, चंचला, दामिनी, सौदामिनी, तड़ित, बीजुरी, घनवल्ली, क्षणप्रभा, करका.
बारिश – वर्षण, वृष्टि, वर्षा, पावस, बरसात.
वीर्य – जीवन, सार, तेज, शुक्र, बीज.
वज्र – कुलिस, पवि, अशनि, दभोलि.
विशाल – विराट, दीर्घ, वृहत, बड़ा, महान.
वृक्ष – गाछ, तरु, पेड़, द्रुम, पादप, विटप, शाखी.

*श🎋👇👇*
शिव – भोलेनाथ, शम्भू, त्रिलोचन, महादेव, नीलकंठ, शंकर.
शरीर – देह, तनु, काया, कलेवर, अंग, गात.
शत्रु – रिपु, दुश्मन, अमित्र, वैरी, अरि, विपक्षी.
शिक्षक – गुरु, अध्यापक, आचार्य, उपाध्याय.
शेर – केहरि, केशरी, वनराज, सिंह.
शेषनाग – अहि, नाग, भुजंग, व्याल, उरग, पन्नग, फणीश, सारंग.
शुभ्र – गौर, श्वेत, अमल, वलक्ष, शुक्ल, अवदात.
शहद – पुष्परस, मधु, आसव, रस, मकरन्द.
*ष🎋👇👇*
षंड – हीजड़ा, नपुंसक, नामर्द.
षडानन – षटमुख, कार्तिकेय, षाण्मातुर.

*👇👇स🎋*
सीता – वैदेही, जानकी, भूमिजा, जनकतनया, जनकनन्दिनी, रामप्रिया.
साँप – अहि, भुजंग, ब्याल, सर्प, नाग, विषधर, उरग, पवनासन.
सूर्य – रवि, सूरज, दिनकर, प्रभाकर, आदित्य, दिनेश, भास्कर, दिनकर, दिवाकर, भानु, आदित्य.
संसार – जग, विश्व, जगत, लोक, दुनिया.
सोना – स्वर्ण, कंचन, कनक, हेम, कुंदन.
सिंह – केसरी, शेर, मृगपति, वनराज, शार्दूल, नाहर, सारंग, मृगराज.
समुद्र – सागर, पयोधि, उदधि, पारावार, नदीश, जलधि, सिंधु, रत्नाकर, वारिधि.
सम – सर्व, समस्त, सम्पूर्ण, पूर्ण, समग्र, अखिल, निखिल.
समीप – सन्निकट, आसन्न, निकट, पास.
समूह – दल, झुंड, समुदाय, टोली, जत्था, मण्डली, वृंद, गण, पुंज, संघ, समुच्चय.
सभा – अधिवेशन, संगीति, परिषद, बैठक, महासभा.
सुन्दर – कलित, ललाम, मंजुल, रुचिर, चारु, रम्य, मनोहर, सुहावना, चित्ताकर्षक, रमणीक, कमनीय, उत्कृष्ट, उत्तम, सुरम्य.
सन्ध्या – सायंकाल, शाम, साँझ, प्रदोषकाल, गोधूलि.
स्त्री – सुन्दरी, कान्ता, कलत्र, वनिता, नारी, महिला, अबला, ललना, औरत, कामिनी, रमणी.
सुगंधि – सौरभ, सुरभि, महक, खुशबू.
स्वर्ग – सुरलोक, देवलोक, दिव्यधाम, ब्रह्मधाम, द्यौ, परमधाम, त्रिदिव, दयुलोक.
स्वर्ण – सुवर्ण, कंचन, हेन, हारक, जातरूप, सोना, तामरस, हिरण्य.
सरस्वती – गिरा, शारदा, भारती, वीणापाणि, विमला, वागीश, वागेश्वरी.
सहेली – आली, सखी, सहचरी, सजनी, सैरन्ध्री.
संसार – लोक, जग, जहान, जगत, विश्व.
*ह🎋*
हस्त – हाथ, कर, पाणि, बाहु, भुजा.
हिमालय – हिमगिरी, हिमाचल, गिरिराज, पर्वतराज, नगेश.
हिरण – सुरभी, कुरग, मृग, सारंग, हिरन.
होंठ – अक्षर, ओष्ठ, ओंठ.
हनुमान – पवनसुत, पवनकुमार, महावीर, रामदूत, मारुततनय, अंजनीपुत्र, आंजनेय, कपीश्वर, केशरीनंदन, बजरंगबली, मारुति.
हिमांशु – हिमकर, निशाकर, क्षपानाथ, चन्द्रमा, चन्द्र, निशिपति.
हंस – कलकंठ, मराल, सिपपक्ष,
मानसौक.
हृदय – छाती, वक्ष, वक्षस्थल, हिय, उर.
हाथ – हस्त, कर, पाणि.
हाथी – हस्ती, कुंजर, कूम्भा, मतंग, वारण, गज, द्विप,

काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

छतरपुर, दिनांक 11 जुलाई 2026 विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत, मध्यप्रदेश की छतरपुर इकाई द्वारा स्वामी विवेकानंद सभागार, गायत्री शक्तिप...