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Friday, February 14, 2020

गीत :- शहीद


गीत:- शहीद

हमारा तिरंगा है हमारा वतन।
करते शहीदों को शत् शत् नमन।।


शहीदों के चरणों सिर को झुकाए।
सदा मातृभूमि की गीत गुनगुनाए।।
खुशबु से महके अपना चमन।
करते शहीदों को शत् शत् नमन।।1।।


लिपटकर तिरंगे में आता रहूँगा।
लाज हिन्दोस्तां की बचाता रहूँगा।।
होने ना देगे कभी इसका पतन।
करते शहीदों को शत् शत् नमन।।2।।

उठाये निगाहे जो उसे फोड़ दूंगा।
हड्डी पसली बैरी मैं तोड़ दूंगा
करेंगा दुबारा ना कोई यतन।
करते शहीदों को शत् शत् नमन।।3।।


वीरता भी वीरों की गाते रहेंगे।
आशीष वीरों का पाते रहेंगे।।
सिर पर दिखेगी ना भारत शिकन।
करते शहीदों को शत् शत् नमन।।4।।

नीतेन्द्र सिंह परमार 'भारत'
अध्यक्ष:- विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत
मध्यप्रदेश इकाई
दिनांक:- 14/02/2020
।।





Thursday, February 13, 2020

गीत



.                *गीत सुहाने*
तर्ज:-कौन दिशा में लेके...
फिल्म:- नदिया के पार
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
साथी विन लागे मोहे,अन्जानी डगरिया।।
पीली सरसों की बहार,लाई बसन्ती उपहार।
हो मन सूना है,सूना है.....
काटे नही कटती है अन्जानी डगरिया....
                  *(१)*
हो कैसा सावन झूम के आया,तन मन आग लगाय रे।।
विन सजनी मन के मन नहीं लागे,कैसे अगन बुझाय रे।।

पिहूँ पिहूँ बोल रहा है पपीहा।
   राही के विन लागे न जिया।
कैसे करुँ मनुहार रे......
कैसे में अकेले चलूँ,अन्जानी डगरिया....
                  *(२)*
मन पंछी चातक के जैसा,स्वाति की है चाह रे।।
वन के पतंगा जल जल जाऊँ,जीवन हुआ तवाह रे।।

अब आजा पास हमारे,
     तन मन तुझको आज पुकारे।
        कैसा तेरा प्यार रे...
संग संग तेरे चलूँ ,अन्जाना डगरिया.....
                *(३)*
तेरे मेरे स्वप्न अधूरे,पूरण की एक आस रे।।
दूर भले मितवा है लेकिन,दिल तो मेरे पास रे।।
हम दोनो एक राह के राही,
      देर न कर अब आजा माही।
तू मेरा संसार रे......
खुशियों से भर मेरी ,अन्जानी डगरिया....
-------------------------------------------
🌹 *शिव गोविन्द सिंह*🌹

Tuesday, February 11, 2020

*◆लयग्राही छंद◆* सोम जी


*◆लयग्राही छंद◆*
विधान-
तगण तगण तगण गुरु गुरु
(221  221  221 2   2)
4चरण,दो-दो चरण समतुकांत।

हे  रामराजा  मुझे  तार   दीजै।
मैं दास हूँ नाथ स्वीकार कीजै।।
सत्कार  सेवा नहीं  जानता हूँ।
सर्वस्य आपै  सदा  मानता हूँ।।

                ~शैलेन्द्र खरे"सोम"

Wednesday, February 5, 2020

वंदना :- बृजमोहन साथी जी

*माँ वंदना*

हमें  बस  तुम्हारा  सहारा  है  माँ ।
तुम्ही  ने ये जीवन निखारा है माँ ।।

हमारी  ये  *नैया* नही   डूबती ।
दिये ज्ञान  से  माँ  ये  है तैरती  ।।
तू ही  धार  तू  ही किनारा है माँ ।
*हमें बस तुम्हारा................*

मधुर  स्वर  प्रकृति के यूँ माँ  से कहे ।
पवन  ये  बसंती  कहाँ  फिर रहे  ।।
नही तुम बिना कुछ गवारा है माँ ।
*हमें बस तुम्हारा.................*

तू   श्वेत   वर्णी  है   कमलासिनी ।
सुरो की है गंगा माँ  पदमासिनी ।।
ये  संसार  तुमने  सवांरा  है माँ ।
*हमें बस तुम्हारा ................*
दया  की रखो  हम  पे मैहर सदा ।
नही हमको करना माँ खुद से जुदा ।।
नही कोई  तुम बिन हमारा है माँ ।
*हमें बस तुम्हारा.................*

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
कवि बृजमोहन श्रीवास्तव "साथी"डबरा

Tuesday, February 4, 2020

चौपइया छंद [सम मात्रिक] -सोम

*◆ चौपइया छंद [सम मात्रिक] ◆*
धान~
{4 चरण समतुकांत,प्रति चरण 30 मात्राएँ,
प्रत्येक में 10,8,12 मात्राओं पर यति
प्रथम व द्वितीय यति समतुकांत,
जगण वर्जित, प्रत्येक चरणान्त में गुरु(2),
चरणान्त में दो गुरु होने पर यह छंद
मनोहारी हो जाता है।}

अति भये दुखारे,तकि-तकि हारे,
                            जड़-चेतन अकुलाने।
चक,पिक,बक,दादुर,परम भयातुर,
                            तरु-पल्लव मुरझाने।।
वन,उपवन,निर्झर,कूप,नदी,सर,
                          उरग,मकर अरु मीना।
खग-मृग मानहिं डर,चिंतित हलधर,
                         हैं सब प्रकृति अधीना।।

जे कवन  सुभीते, ले घट रीते,
                          गेह  फिरहिं पनिहारी।
बह ऊष्ण समीरा,हृदय न धीरा,
                          पंथहिं पथिक दुखारी।।
जल बिन कठिनाई,महि अकुलाई,
                          विनय करत करजोरी।
हे  दीनदयाला, "सोम"  कृपाला,
                         करहुँ सुरत प्रभु मोरी।।
              
                         *~शैलेन्द्र खरे"सोम"*

Sunday, February 2, 2020

वार्षिकोत्सव

*विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत छतरपुर मध्यप्रदेश इकाई*

*जय-जय*~🌺🙏🌺

आज दिनांक 3 फरवरी 2020 को विश्व जनचेतना ट्रस्ट का वार्षिकोत्सव समारोह मनाया जा रहा है। जिसमें काव्य गोष्ठी व सम्मान समारोह का कार्यक्रम रखा गया है। जिसमें नगर के सभी वरिष्ठ व विशिष्ट साहित्यकार व नवोदित कवि सम्मिलित होंगे।
आप सभी से निवेदन है कि इस कार्यक्रम में ससमय उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाएँ तथा हम सभी का अपने आशीर्वाद से हौसला बढ़ाएँ।उपस्थिति प्रार्थनीय है|

कार्यक्रम स्थल:- बुन्देला केशरी महाराजा छत्रसाल स्मारक ट्रस्ट चौक बाजार छतरपुर  (म.प्र.)

समय:- सायंकाल 5 बजे कार्यक्रम प्रारंभ कर दिया जायेगा।
नोट:- ( कृपया समय का विशेष ध्यान रखें।)

निवेदक
अध्यक्ष
नीतेन्द्र सिंह परमार "भारत"
विश्व  जनचेतना ट्रस्ट भारत
छतरपुर मध्यप्रदेश

Friday, January 31, 2020

सुविचार - 1/2/2020

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*सुविचार*

जीवन में नित बढ़ते रहना।
विपदाओं से लड़ते रहना।।
थककर अब मत बैठ मुसाफिर।
सुविचार सब गढ़ते रहना।।

*नीतेन्द्र सिंह परमार "भारत"*
{ ०१/०२/२०२० }

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🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

Thursday, January 30, 2020

गीत साथी

गीत
बहर- 122, 122, 122, 12

हमें  बस  तुम्हारा  सहारा  है  माँ ।
तुम्ही  ने ये जीवन निखारा है माँ ।।

हमारी  ये  *नैया* नही   डूबती ।
दिये ज्ञान  से  माँ  ये  है तैरती  ।।
तू ही  धार  तू  ही किनारा है माँ ।
*हमें बस तुम्हारा................*

मधुर  स्वर  प्रकृति के यूँ माँ  से कहे ।
पवन  ये  बसंती  कहाँ  फिर रहे  ।।
नही तुम बिना कुछ गवारा है माँ ।
*हमें बस तुम्हारा.................*

तू   श्वेत   वर्णी  है   कमलासिनी ।
सुरो की है गंगा माँ  पदमासिनी ।।
ये  संसार  तुमने  सवांरा  है माँ ।
*हमें बस तुम्हारा ................*
दया  की रखो  हम  पे मैहर सदा ।
नही हमको करना माँ खुद से जुदा ।।
नही कोई  तुम बिन हमारा है माँ ।
*हमें बस तुम्हारा.................*

🌻🌻🌻🌻563🌻🌻🌻🌻
कवि बृजमोहन श्रीवास्तव "साथी"डबरा

Tuesday, January 28, 2020

वसन्त पंचमी का शौर्य

मत चूको चौहान

वसन्त पंचमी का शौर्य

*चार बांस, चौबीस गज, अंगुल अष्ठ प्रमाण!*
*ता उपर सुल्तान है, चूको मत चौहान!!*

वसंत पंचमी का दिन हमें "हिन्दशिरोमणि पृथ्वीराज चौहान" की भी याद दिलाता है। उन्होंने विदेशी इस्लामिक आक्रमणकारी मोहम्मद गौरी को 16 बार पराजित किया और उदारता दिखाते हुए हर बार जीवित छोड़ दिया, पर जब सत्रहवीं बार वे पराजित हुए, तो मोहम्मद गौरी ने उन्हें नहीं छोड़ा। वह उन्हें अपने साथ बंदी बनाकर काबुल  अफगानिस्तान ले गया और वहाँ उनकी आंखें फोड़ दीं।

पृथ्वीराज का राजकवि चन्द बरदाई पृथ्वीराज से मिलने के लिए काबुल पहुंचा। वहां पर कैद खाने में पृथ्वीराज की दयनीय हालत देखकर चंद्रवरदाई के हृदय को गहरा आघात लगा और उसने गौरी से बदला लेने की योजना बनाई।

चंद्रवरदाई ने गौरी को बताया कि हमारे राजा एक प्रतापी सम्राट हैं और इन्हें शब्दभेदी बाण (आवाज की दिशा में लक्ष्य को भेदनाद्ध चलाने में पारंगत हैं, यदि आप चाहें तो इनके शब्दभेदी बाण से लोहे के सात तवे बेधने का प्रदर्शन आप स्वयं भी देख सकते हैं।

इस पर गौरी तैयार हो गया और उसके राज्य में सभी प्रमुख ओहदेदारों को इस कार्यक्रम को देखने हेतु आमंत्रित किया।

पृथ्वीराज और चंद्रवरदाई ने पहले ही इस पूरे कार्यक्रम की गुप्त मंत्रणा कर ली थी कि उन्हें क्या करना है। निश्चित तिथि को दरबार लगा और गौरी एक ऊंचे स्थान पर अपने मंत्रियों के साथ बैठ गया।

चंद्रवरदाई के निर्देशानुसार लोहे के सात बड़े-बड़े तवे निश्चित दिशा और दूरी पर लगवाए गए। चूँकि पृथ्वीराज की आँखे निकाल दी गई थी और वे अंधे थे, अतः उनको कैद एवं बेड़ियों से आजाद कर बैठने के निश्चित स्थान पर लाया गया और उनके हाथों में धनुष बाण थमाया गया।

इसके बाद चंद्रवरदाई ने पृथ्वीराज के वीर गाथाओं का गुणगान करते हुए बिरूदावली गाई तथा गौरी के बैठने के स्थान को इस प्रकार चिन्हित कर पृथ्वीराज को अवगत करवाया

‘‘चार बांस, चैबीस गज, अंगुल अष्ठ प्रमाण।
ता ऊपर सुल्तान है, चूको मत चौहान।।’’

अर्थात् चार बांस, चैबीस गज और आठ अंगुल जितनी दूरी के ऊपर सुल्तान बैठा है, इसलिए चौहान चूकना नहीं, अपने लक्ष्य को हासिल करो।

इस संदेश से पृथ्वीराज को गौरी की वास्तविक स्थिति का
आंकलन हो गया। तब चंद्रवरदाई ने गौरी से कहा कि पृथ्वीराज आपके बंदी हैं, इसलिए आप इन्हें आदेश दें, तब ही यह आपकी आज्ञा प्राप्त कर अपने शब्द भेदी बाण का प्रदर्शन करेंगे।

इस पर ज्यों ही गौरी ने पृथ्वीराज को प्रदर्शन की आज्ञा का आदेश दिया, पृथ्वीराज को गौरी की दिशा मालूम हो गई और उन्होंने तुरन्त बिना एक पल की भी देरी किये अपने एक ही बाण से गौरी को मार गिराया।

गौरी उपर्युक्त कथित ऊंचाई से नीचे गिरा और उसके प्राण पंखेरू उड़ गए। चारों और भगदड़ और हा-हाकार मच गया, इस बीच पृथ्वीराज और चंद्रवरदाई ने पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार एक-दूसरे को
कटार मार कर अपने प्राण त्याग दिये।

"आत्मबलिदान की यह घटना भी 1192 ई. वसंत पंचमी वाले दिन ही हुई थी।"

Sunday, January 26, 2020

पुस्तक विमोचन बंजारा मन,पथरीली राहे

आज एक स्थानीय होटल के सभागार में श्रीमती विमल बुन्देला के तीसरे काव्य संग्रह 'बंजारा मन पथरीली आँखें' का विमोचन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर संतोष भदौरिया , पूर्व राज्य सभा सदस्य व चिंतक श्री सत्य व्रत चतुर्वेदी ने समारोह पूर्वक किया। इस अवसर पर वरिष्ठ गीतकार सुरेंद्र शर्मा शिरीष , कवयित्री श्री मती मालती श्रीवास्तव, नपा अध्यक्ष अर्चना गुड्डू सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहीं। सभागार में शहर साहित्यकार, कविगण, चिकित्सक, बुद्धिजीवी व रसिक श्रोता उपस्थित रहे। संचालन मैंने किया।
समारोह में सरस्वती पूजन के उपरांत सरस्वती वंदना राघवेंद्र उदैनियाँ ने की। आभा श्रीवास्तव ने रचनाओं पर प्रकाश डाला। स्वागत वक्तव्य डा. यशपाल बुन्देला ने दिया। डा. आराधना सिंह ने विमल जी की कविता का पाठ किया। प्रोफेसर संतोष भदौरिया ने काव्य संग्रह पर विस्तार से प्रकाश डालकर उनकी कविताओं में प्रेम, प्रकृति, नारी मन की सुकुमारता के साथ सच कक्षने के साहस की तारीफ की। उन्होंने बताया कि इसमें स्वप्न दर्शिता के साथ आशा वादिता है। वे संघर्ष को प्रेरित करती हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में सत्यव्रत चतुर्वेदी ने इनकी रचनाओं को समय की महत्वपूर्ण रचना बताया। आभार डा.  एस . एस. बुन्देला ने व्यक्त किया।

Saturday, January 25, 2020

*आनलाइन अखिल कवि सम्मेलन कार्यक्रम* 25/01/2020

*🌹🇮🇳मेरी शान-मेरा हिन्दुस्तान🇮🇳🌹*

*आनलाइन अखिल कवि सम्मेलन कार्यक्रम*

*दिनांक ~ 25 जनवरी 2020 ,शनिवार।*
*प्रारम्भ - शाम 5 : 30 बजे*
*सरस्वती वंदना - 5 :30*
*स्वागत गीत ~ 5 : 35*
*अध्यक्षीय उद्वोधन - 5 :40*
*मुख्य अतिथि उद्वोधन - 5:45*
*संरक्षकीय उद्बोधन ~ 5:50*
🎤🎤🎤🎤🎤🎤🎤🎤
आप सभी की उपस्थिति ~😊🙏😊

*कार्यक्रम संचालक -नीतेन्द्र सिंह परमार 'भारत' जी*
*सह-संचालक - ओमप्रकाश फुलारा'प्रफुल्ल' जी*

कार्यक्रम संरक्षक~कौशल कुमार पाण्डेय "आस" जी
कार्यक्रम अध्यक्ष ~छंदगुरु शैलैन्द्र खरे "सोम" जी

*मुख्य अतिथि-*
*आद० मीना भट्ट जी एवं*
*आद० डॉ०सवितुर प्रकाश गंगवार जी*

*विशिष्ट अतिथि - समस्त नवोदित प्रतिभागी कविगण*

*अनुशासनप्रमुख-*
आ०बृजमोहन श्रीवास्तव साथी जी,
आ०हरीश विष्ट जी एवं
आ०लियाकत अली "जलज" जी

*स्वागत प्रमुख*
1-आ. सुशीला धस्माना "मुस्कान" जी
2-आ. मुकेश शर्मा "ओम" जी
3-आ. डॉ. राहुल शुक्ल "साहिल" जी
4-आ. संतोष कुमार "प्रीत" जी
5-आ. ममता सिंह "मीत" जी
6-राजेश मिश्र "प्रयास" जी
7-आ.दिलीप कुमार पाठक "सरस" जी

आप सभी की उपस्थिति में ससम्मान काव्यपाठ प्रारंभ~(समय 6:10से)

*1 - आ. डॉ. आदेश कुमार गुप्ता जी(6:10)*
*2 - आ. शिवानन्द चौबे जी(6:15)*
*3 - आ. प्रवेश स्वरूप खरे"आकाश" जी(6:20)*
*4 - आ. राघवेंद्र नारायण सिंह 'राघव' जी(6:25)*
*5 - आ. संजय बहिदार जी(6:30)*
*6 - आ. सुशीला जोशी जी(6:35)*
*7 - आ. ब्रजेश त्रिवेदी जी(6:40)*
*8 - आ. गीतांजली वार्ष्णेय जी(6:45)*

*9 - आ. ओम प्रकाश चंचल जी(6:50)*
*10 - आ. इन्दु शर्मा शचि जी(6:55)*
*11 -आ. एस के कपूर श्रीहंस जी(7 :00)*
*12 - आ. कवि कृष्ण कुमार सैनी जी(7:05)*
*13 - आ. सरयू प्रसाद पंडित जी(7:10)*
*14 - आ. राशि श्रीवास्तव जी(7:15)*
*15 -आ. राजेश कुमार तिवारी 'रामू' जी(7:20)*
*16 - आ. बृजमोहन श्रीवास्तव जी(7:25)*

*17 - आ. मंजुलता जैन जी(7:30)*
*18 - आ. अनिता मंदिलवार जी(7:35)*
*19 - आ. सुंदर लाल डडसेना जी(7:40)*
*20 - आ. वीरेंद्र कुमार दसौंधी जी(7:45)*
*21 - आ. अतिया नूर जी(7:50)*
*22 - आ. जितेंद्र परमार जीत जी(7:55)*
*23 - आ. राम स्वरूप मयूरेश जी(8:00)*
*24 - आ. सरोज कँवर शेखावत जी(8:05)*

*25 - आ. मंशा शुक्ला जी(8:10)*
*26 - आ. ओम प्रकाश फुलारा "प्रफुल्ल"जी(8:15)*
*27 - आ. रवि रश्मि अनुभूति जी(8:20)*
*28 - आ. साधना कृष्ण जी(8:25)*
*29 - आ. आरीनिता पांचाल जी(8:30)*
*30 - आ. भुवन बिष्ट जी(8:35)*
*31 - आ. कुमार जितेंद्र जी(8:40)*
*32 - आ. डॉ. सुशील शर्मा जी(8:45)*

*33 -आ. ममता सिंह राठौर जी(8:50)*
*34 - आ. कमल किशोर ताम्रकार जी(8:55)*
*35 - आ. बाबा वैद्यनाथ झा जी(9:00)*
*36 - आ. हरीश बिष्ट जी(9:05)*
*37 - आ. विनोद कुमार हँसोड़ा जी(9:10)*
*38 - आ. अभिज्ञान शाकुन्तलम जी(9:15)*
*39 - आ. डॉ. प्रभा जैन जी(9:20)*
*40 - आ. शिवकान्त प्रजापति अंजान जी(9:25)*

*41 - आ. लाल देवेंद्र श्रीवास्तव जी(9:30)*
*42 - आ. भवानी सिंह राठौर जी(9:35)*
*43 - आ. लाडो कटारिया जी(9:40)*
*44 -आ. राहुल शुक्ल साहिल जी(9:45)*
*45 - आ. अमित रवि दुबे जी(9:50)*
*46 - आ. मीना भट्ट जी(9:55)*
*47 - आ. संतोष तिवारी सागर जी(10:00)*
*48 - आ. नीतेन्द्र सिंह परमार "भारत"जी(10:05)*

*49 - आ. दिलीप कुमार पाठक "सरस"जी(10:10)*
*50 - आ. सुमन कुमार राय जी " वन्दना" (10:15)*
*51 - आ. मोनिका गुप्ता जी(10:20)*
*52 - आ. लियाकत अली जलज जी (10:25)*
*53 - आ. नारायण पोद्दार जी(10:30)*
*54 - आ. शैलेन्द्र खरे "सोम" जी(10:35)*
*55 - आ. इन्दु शर्मा मेधा जी(10:40)*
*56 - आ. राजेश मिश्र प्रयास जी(10:45)*

समीक्षा व संदेश~सादर आमन्त्रित हैं |
😊🙏😊जय-जय 😊🙏😊
निवेदक:-
प्रशासक मंडल
विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत

मेरी शान,मेरा हिन्दुस्तान

*समस्त साहित्यसुधी गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या पर आयोजित आनलाइन कवि सम्मेलन ~ "मेरी शान - मेरा हिन्दुस्तान" कार्यक्रम में यथासंभव यथासमय अपनी उपस्थिति "जय जय काव्य चित्रशाला" में सुनिश्चित करें साथ ही सभी प्रतिभागियों को उत्साहित करने के लिए लिखित प्रतिक्रिया एवं तालियों का प्रयोग करें।कार्यक्रम के मध्य किसी अन्य प्रकार की सामग्री प्रेषित नहीं करें यह बात सभी को ध्यान रखनी है।*
🌸🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌸
  *आप सभी की उपस्थिति आवश्यक एवं अनिवार्य है। आपकी सराहना कवियों में नया जोश पैदा करेगा अतः आप सभी निरंतरता बनाये रखें तथा संचालक एवं कवियों का उत्सावर्धन करते रहें।आपके सराहनीय सहयोग प्राप्त होगा इसी आशा एवं विश्वास के साथ----*
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
*जय जय🌹🙏🏻🌹*

कौशल कुमार पाण्डेय "आस"
             संरक्षक
विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत.

आमंत्रित पत्र

*विशेष सूचना सह आमन्त्रण पत्र*
😊🙏🙏🙏🙏🙏🙏😊

*आज दिनांक 25/01/2020 को अखिल भारतीय भव्य ऑनलाइन कवि सम्मेलन ~मेरी शान, मेरा हिन्दुस्तान ~शाम 6:00.बजे से प्रारम्भ हो जायेगा,जिसमें आप सभी साथियों की उपस्थिति प्रार्थनीय है|*
🎤🌺🙏🌺🙏🌺🙏🌺🎤
नोट~ *कार्यक्रम के निमित्त जय जय काव्य चित्रशाला पर शाम 5:00 बजे के बाद सभी प्रकार की पोस्ट प्रतिबंधित रहेंगी |केवल प्रशासकीय सूचनाएँ व कार्यक्रम का प्रचार प्रसार होगा जिसका अवलोकन आप सभी साथी करेंगे|कुछ विशेष संदेशों का अवलोकन करें|*
*कार्यक्रम के मध्य केवल संचालक महोदय का ऑडियो व सम्बन्धित प्रतिभागी का ही ऑडियो मान्य होगा, अन्य ऑडियो प्रतिबंधित हैं, एक अच्छे श्रोता के रूप आप सबकी लिखित प्रतिक्रिया अत्यन्त आवश्यक है |एक अच्छा साहित्यकार ही एक अच्छा श्रोता होता है |आपकी तालियाँ आपकी प्रतिक्रिया प्रतिभागियों के लिए संजीवनी का काम करेंगी|कार्यक्रम में किसी प्रकार की बाधा छम्य नहीं होगी|आइए मिलकर कार्यक्रम सफल बनाते हैं |आप सब एक अच्छे सक्रिय श्रोता के रूप में हमारे साथ कवि सम्मेलन सुनने हेतु सादर आमन्त्रित हैं |प्रतिभागियों की हौसला-अफजाई लिखित रूप में, टिप्पणी रूप में निरन्तर करते रहें, संचालक महोदय का मनोबल बढ़ाते रहें|यह कार्यक्रम आपके निमित्त है, भव्यता आप ही प्रदान करेंगे|*
जय-जय
😊🙏😊
दिलीप कुमार पाठक "सरस"
       संस्थापक
विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत

Tuesday, January 21, 2020

ताटंक छंद विधान

ताटंक छन्द अर्द्धमात्रिक छन्द है. इस छन्द में चार पद होते हैं, जिनमें प्रति पद 30 मात्राएँ होती हैं.

प्रत्येक पद में दो चरण होते हैं जिनकी यति 16-14 निर्धारित होती है. अर्थात विषम चरण 16 मात्राओं का और सम चरण 14 मात्राओं का होता है. दो-दो पदों की तुकान्तता का नियम है.
प्रथम चरण यानि विषम चरण के अन्त को लेकर कोई विशेष आग्रह नहीं है.

किन्तु, पदान्त तीन गुरुओं से होना अनिवार्य है. इसका अर्थ यह हुआ कि सम चरण का अन्त तीन गुरु से ही होना चाहिये.

महाराष्ट्र की प्रसिद्ध लावणी नृत्य के साथ गाये जाने वाले लोकगीत इसी छन्द में निबद्ध होते हैं. इन गीतों के पदान्त दो लघुओं के बाद दो गुरुओं से भी होता है. या, कई बार तो ऐसी कोई शर्त निभायी ही नहीं जाती. अर्थात लावणी के लोक-गीत कुकुभ या ताटंक छन्द की ही अन्य प्रारूप की तरह हैं.

इसका कुल अर्थ यह हुआ कि कुकुभ छन्द तथा ताटंक छन्द में बड़ा ही महीन अन्तर है.
चार पदों एवं 16-14 की यति का वह छन्द जिसका पदान्त दो गुरुओं से हो कुकुभ छन्द कहलाता है. जबकि
चार पदों एवं 16-14 की यति का वह छन्द जिसका पदान्त तीन गुरुओं से हो ताटंक छन्द कहलाता है.

Monday, January 20, 2020

मकर संक्रांति

*विशेष सूचना*
जय जय~😄🙏😄👍
मकर संक्रांति के पावन पर्व पर आप सभी साहित्यकार साथियों ने मकर संक्रांति पर्व को प्रकाशित करने वाली उत्कृष्ट रचनाओं से जय जय हिन्दी परिवार को सुशोभित किया है, आप सबको हार्दिक बधाई देते हुए अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है |🏆👌🏻😄🙏😄
यह कहते हुए अपार हर्ष हो रहा है कि आप सबकी विषय विशेष रचनाओं पर आधारित
🏆 *मकर संक्रांति ई विशेषांक* 🏆
उत्तराखंड इकाई के अध्यक्ष,अलंकरण सहयोगी, प्रिय अनुज प्रफुल्ल जी के सौजन्य से सम्पादित हो चुका है|जिसका विमोचन~संस्था संरक्षक आ. कौशल पाण्डेय "आस" जी की अध्यक्षता में संस्था उपाध्यक्ष आ. डॉ. राहुल शुक्ल "साहिल" जी द्वारा होना सुनिश्चित है |इसी के साथ पर्व आधारित रचना सृजन,मनहरण घनाक्षरी छंद व ऑडियो प्रस्तुतिकरण हेतु रचनाकारों का सम्मान समारोह आज दिनांक ~16/01/2020 को शाम 7:00 बजे जय जय काव्य चित्रशाला में आप सबकी उपस्थिति में सम्पन्न होगा |उपस्थिति सादर  प्रार्थनीय है|
*🌷सम्मान पत्र प्रदाता🌷 ~*
आ. शैलेन्द्र खरे "सोम" दादाश्री
आ. मुकेश शर्मा "ओम" दादाश्री
😊🙏😊🎤
आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि आप इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनेंगे|

नोट~ *जो साथी जय जय काव्य चित्रशाला पर नहीं जुड़े हैं और जुड़ना चाहते हैं तो अवगत करा दें, सादर आपका स्वागत है |*👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏
आगामी प्रस्तावित कार्यक्रम ~
1-गणतन्त्र दिवस की पूर्व संध्या पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन धमाल|
2- गणतन्त्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व पर आधारित *हिन्दुस्तान* ई विशेषांक का विमोचन व सम्मान समारोह|(रचनाएँ भेजिए)
🎤🙏🎤🙏🎤🙏🎤👍
वंसतपंचमी के पावन पर्व पर *माँ शारदे वंदना* पर आधारित

1- चलचित्र प्रस्तुति ~जय जय काव्य चित्रशाला पर

2-छंद विशेष पर लिखित वंदना~साहित्यिकि पाठशाला पर

3-लिखित किसी प्रकार से माँ शारदे की वंदना~जय जय हिन्दी पर |
आप सभी साथियों का हार्दिक स्वागत है 🌷👏🌷
वंदन है 🌷👏👏🌷
अभिनंदन है 🌷👏👏👏🌷|

😊🙏😊

दिलीप कुमार पाठक "सरस"
            संस्थापक
विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत

नर्स के लिए समाज का दृष्टिकोण

समाज की दृष्टि और सोच नर्स के लिए क्या है ?

हम सभी आधुनिक युग में जीवन यापन कर रहे हैं।सभी लोग सोचने,रहने,खाने,पहनने और सभी प्रकार की सुविधाओं के लिए स्वतंत्र है। हम दरअसल आपको बताने जा रहे है। एक ऐसे सोच वाले समाज की जो लोग केवल गंदी सोच रखते है उनके प्रति पर कभी अपने आप को वहा रखकर नहीं देखेंगे। हम उन लोगो से कोई शिकायत नहीं परंतु जब कुछ लोग उसे अपनी बेटी के रूप में देखना चाहते है।परंतु बहू के रूप में नहीं।
    आप सभी को मालूम है। जीवन में स्वस्थ्य का कितना महत्व है। थोड़ा सा मौसम में बदलाव क्या आता है। सभी लोग बीमार होने लगते है। वे ही लोग ज्यादा गर्मी,सर्दी और बरसात सहन नहीं कर पाते हैं। परंतु जब बीमार होते है। तो तुरंत डॉक्टर के पास आते है।फिर डॉक्टर उन्हे भर्ती करता है। और एक बड़ा सा पर्चा बनाकर नर्स से बोल देता है।इसकी इतने समय पर ये ये दवाई आपको खिलानी है। नर्स खुशी खुशी उसे हॉस्पिटल के वार्ड में भर्ती करती है। और उसका इलाज करती है। एक माँ के रूप में,बहिन के रूप में,एक सच्ची सेविका के रूप में,परिचारिका के रूप में।लेकिन कभी ये नहीं ध्यान देते है लोग की पूरा ज़िन्दगी हँसी हँसी में आप सबके लिए निकाल देती है। कई लोगो का कहना होगा कि उन्हे उस काम का हर्जाना (भत्ता/वेतन) दिया जाता है।यकीनन मिलता है,परंतु कभी आप भी एक दिन हमारी तरह जीवन जी कर तो देखो।आप जीवन जीना ही भूल जायेगे।
       रात में किसी मरीज को कोई तकलीफ हो तो दौड़कर जाती है। तथा उसका इलाज करती है।कभी भी यह नहीं सोंचते कि वह किस जाति,साम्प्रदाय का है।अध जले शरीर से आप लोग दूर भागते है। लेकिन हम उनका इलाज दिन रात करते है।रात दिन जागती है। किसलिए केवल आपकी सेवा के लिए। इसके बाद उसे घर जाकर अपने परिवार वालो के लिए खाना बनाना,बच्चे को स्कूल भेजना,मकान की साफ सफाई करना तथा सास ससुर माता पिता की सेवा आदि करना पड़ती है। वह आराम कब करती है। कभी नहीं सोचा होगा आपने आपको तो केवल मुँह चलाने से बस मतलब है कि वह अपने स्वाभाव से बेकार है।और जितनी आपकी सोच गिरी हुई हम उतना हम लिखते नहीं सकते है। केवल आप समझते जाये। थोड़ी अपनी सोच बदलो,बेटी को यदि आप नर्स के रूप में देखना पसंद करते है। तो आपको अपनी बहू के रूप में भी स्वीकारना पडे़गा।
यदि किसी भी सज्जन को कोई बात लगत लगी हो तो हम क्षमाप्रार्थी हैं। परंतु ऐसे सोच वाले लोगो को सबक सिखाना ही होगा।

लेखन:-
नीतेन्द्र सिंह परमार "भारत"
छतरपुर मध्यप्रदेश

हल्दीघाटी

क्या आपने कभी पढ़ा है कि हल्दीघाटी के बाद अगले १० साल में मेवाड़ में क्या हुआ?? इतिहास से जो पन्ने हटा दिए गए हैं उन्हें वापस संकलित करना ही होगा क्यूँकि वही हिन्दू रेजिस्टेंस और शौर्य के प्रतीक हैं।

इतिहास में तो ये भी नहीं पढ़ाया गया है कि हल्दीघाटी युद्ध में जब महाराणा प्रताप ने कुंवर मानसिंह के हाथी पर जब प्रहार किया तो शाही फ़ौज पाँच छह कोस दूर तक भाग गई थी और अकबर के आने की अफवाह से पुनः युद्ध में सम्मिलित हुई है,

ये वाकया अबुल फज़ल की पुस्तक अकबरनामा में दर्ज है, क्या हल्दी घाटी अलग से एक युद्ध था..या एक बड़े युद्ध की छोटी सी घटनाओं में से बस एक शुरूआती घटना....

महाराणा प्रताप को इतिहासकारों ने हल्दीघाटी तक ही सीमित करके मेवाड़ के इतिहास के साथ बहुत बड़ा अन्याय किया है, वास्तविकता में हल्दीघाटी का युद्ध, महाराणा प्रताप और मुगलो के बीच हुए कई युद्धों की शुरुआत भर था।

मुग़ल न तो प्रताप को पकड़ सके और न ही मेवाड़ पर आधिपत्य जमा सके, हल्दीघाटी के बाद क्या हुआ वो हम बताते हैं। हल्दीघाटी के युद्ध के बाद महाराणा के पास सिर्फ 7000 सैनिक ही बचे थे,

और कुछ ही समय में मुगलों का कुम्भलगढ़, गोगुंदा, उदयपुर और आसपास के ठिकानों पर अधिकार हो गया था, उस स्थिति में महाराणा ने “गुरिल्ला युद्ध” की योजना बनायीं और मुगलों को कभी भी मेवाड़ में सेटल नहीं होने दिया. महाराणा के शौर्य से विचलित अकबर ने उनको दबाने के लिए 1576 में हुए हल्दीघाटी के बाद भी हर साल 1577 से 1582 के बीच एक एक लाख के सैन्यबल भेजे जो कि महाराणा को झुकाने में नाकामयाब रहे।

हल्दीघाटी युद्ध के पश्चात् महाराणा प्रताप के खजांची भामाशाह और उनके भाई ताराचंद मालवा से दंड के पच्चीस लाख रुपये और दो हज़ार अशर्फियाँ लेकर हाज़िर हुए,

इस घटना के बाद महाराणा प्रताप ने भामाशाह का बहुत सम्मान किया और दिवेर पर हमले की योजना बनाई। भामाशाह ने जितना धन महाराणा को राज्य की सेवा के लिए दिया उस से 25 हज़ार सैनिकों को 12 साल तक रसद दी जा सकती थी।

बस फिर क्या था..महाराणा ने फिर से अपनी सेना संगठित करनी शुरू की और कुछ ही समय में 40000 लड़ाकों की एक शक्तिशाली सेना तैयार हो गयी।

उसके बाद शुरू हुआ हल्दीघाटी युद्ध का दूसरा भाग जिसको इतिहास से एक षड्यंत्र के तहत या तो हटा दिया गया है या एकदम दरकिनार कर दिया गया है, इसे बैटल ऑफ़ दिवेर* कहा गया गया है।

बात सन १५८२ की है, विजयदशमी का दिन था और महराणा ने अपनी नयी संगठित सेना के साथ मेवाड़ को वापस स्वतंत्र कराने का प्रण लिया. उसके बाद सेना को दो हिस्सों में विभाजित करके युद्ध का बिगुल फूँक दिया।

एक टुकड़ी की कमान स्वंय महाराणा के हाथ थी दूसरी टुकड़ी का नेतृत्व उनके पुत्र अमर सिंह कर रहे थे, कर्नल टॉड ने भी अपनी किताब में हल्दीघाटी को Thermopylae of Mewar और दिवेर के युद्ध को राजस्थान का मैराथन बताया है।

ये वही घटनाक्रम हैं जिनके इर्द गिर्द आप फिल्म 300 देख चुके हैं, कर्नल टॉड ने भी महाराणा और उनकी सेना के शौर्य, तेज और देश के प्रति उनके अभिमान को स्पार्टन्स के तुल्य ही बताया है जो युद्ध भूमि में अपने से 4 गुना बड़ी सेना से यूँ ही टकरा जाते थे।

दिवेर का युद्ध बड़ा भीषण था, महाराणा प्रताप की सेना ने महाराजकुमार अमर सिंह के नेतृत्व में दिवेर थाने पर हमला किया, हज़ारो की संख्या में मुग़ल, राजपूती तलवारो बरछो भालो और कटारो से बींध दिए गए।

युद्ध में महाराजकुमार अमरसिंह ने सुलतान खान मुग़ल को बरछा मारा जो सुल्तान खान और उसके घोड़े को काटता हुआ निकल गया। उसी युद्ध में एक अन्य राजपूत की तलवार एक हाथी पर लगी और उसका पैर काट कर निकल गई।

महाराणा प्रताप ने बहलेखान मुगल के सर पर वार किया और तलवार से उसे घोड़े समेत काट दिया, शौर्य की ये बानगी इतिहास में कहीं देखने को नहीं मिलती है. उसके बाद यह कहावत बनी कि मेवाड़ में सवार को एक ही वार में घोड़े समेत काट दिया जाता है।

ये घटनाये मुगलो को भयभीत करने के लिए बहुत थी।
बचे खुचे ३६००० मुग़ल सैनिकों ने महाराणा के सामने आत्म समर्पण किया, दिवेर के युद्ध ने मुगलो का मनोबल इस तरह तोड़ दिया कि जिसके परिणाम स्वरुप मुगलों को मेवाड़ में बनायीं अपनी सारी 36 थानों, ठिकानों को छोड़ के भागना पड़ा,

यहाँ तक कि जब मुगल कुम्भलगढ़ का किला तक रातो रात खाली कर भाग गए, दिवेर के युद्ध के बाद प्रताप ने गोगुन्दा, कुम्भलगढ़, बस्सी, चावंड, जावर, मदारिया, मोही, माण्डलगढ़ जैसे महत्त्वपूर्ण ठिकानो पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद भी महाराणा और उनकी सेना ने अपना अभियान जारी रखते हुए सिर्फ चित्तौड़ को छोड़ के मेवाड़ के सारे ठिकाने/दुर्ग वापस स्वतंत्र करा लिए।

अधिकांश मेवाड़ को पुनः कब्जाने के बाद महाराणा प्रताप ने आदेश निकाला कि अगर कोई एक बिस्वा जमीन भी खेती करके मुसलमानो को हासिल (टैक्स) देगा, उसका सर काट दिया जायेगा।इसके बाद मेवाड़ और आस पास के बचे खुचे शाही ठिकानो पर रसद पूरी सुरक्षा के साथ अजमेर से मँगाई जाती थी।

दिवेर का युद्ध न केवल महाराणा प्रताप बल्कि मुगलो के इतिहास में भी बहुत निर्णायक रहा।  मुट्ठी भर राजपूतों ने पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर राज करने वाले मुगलो के ह्रदय में भय भर दिया। दिवेर के युद्ध ने मेवाड़ में अकबर की विजय के सिलसिले पर न सिर्फ विराम लगा दिया बल्कि मुगलो में ऐसे भय का संचार कर दिया कि अकबर के समय में मेवाड़ पर बड़े आक्रमण लगभग बंद हो गए।

इस घटना से क्रोधित अकबर ने हर साल लाखों सैनिकों के सैन्य बल अलग अलग सेनापतियों के नेतृत्व में मेवाड़ भेजने जारी रखे लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिली।

अकबर खुद 6 महीने मेवाड़ पर चढ़ाई करने के मकसद से मेवाड़ के आस पास डेरा डाले रहा लेकिन ये महराणा द्वारा बहलोल खान को उसके घोड़े समेत आधा चीर देने के ही डर था कि वो सीधे तौर पे कभी मेवाड़ पे चढ़ाई करने नहीं आया।

ये इतिहास के वो पन्ने हैं जिनको दरबारी इतिहासकारों ने जानबूझ कर पाठ्यक्रम से गायब कर दिया है".।*
जिन्हें अब वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है।
आप भी इस प्रयास में जुड़ें।

वीर शिरोमणि #महाराणा प्रताप जी के 423वी पुण्यतिथि पर शत शत नमन 🚩🙏

काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

छतरपुर, दिनांक 11 जुलाई 2026 विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत, मध्यप्रदेश की छतरपुर इकाई द्वारा स्वामी विवेकानंद सभागार, गायत्री शक्तिप...